बलिया जिले के स्थापना दिवस पर नगर के शहीद पार्क चौक स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण
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बलिया। जिले का 144 वां स्थापना दिवस शहीद पार्क चौक में मंगलवार को केक काटकर मनाया गया। इस दौरान लोगों ने क्रांति धरा बलिया की गाथा का बखान किया। इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने कहा कि 1857 में ईस्ट इण्डिया कम्पनी की पैदल सेना के सैनिक मंगल पाण्डेय के विद्रोह, चौरा गांव में ब्रिटिश खजाने की लूट, गोविन्द मल्लाह की शहादत और लिलकर के बाबू गरीब नारायण राय की विद्रोही सेना द्वारा बलिया, आजमगढ, देवरिया, गोरखपुर और चम्पारण से अंग्रेजों को खदेड़ने के बाद 1858 में वीरवर कुंवर सिंह के विजय अभियान ने ब्रिटिश सरकार को बलिया प्रशासनिक इकाई बनाने के लिए विवश कर दिया। एक नवम्बर 1879 को गाजीपुर, आजमगढ़ और बिहार राज्य के शाहाबाद जिले के बिहिया परगना के कुछ गांवों को लेकर इस बगावती भू-भाग को बलिया नाम से जिला बना दिया गया। यहां के पहले कलेक्टर बने डीटी राबर्ट। डॉ. कौशिकेय ने बताया कि इसके बाद भी इस जिले की जनता के बगावती तेवर कम नहीं हुआ और एकबार फिर 1942 में जिले की जनता ने ब्रिटिश साम्राज्य से सत्ता छीनकर स्वराज की सरकार बना ली। तत्कालीन कलेक्टर जगदीश्वर निगम और एसपी रियाजुद्दीन खां की कूटनीतिक चाल के कारण यहां स्वराज सरकार का शासन लम्बे समय तक नहीं चल सका। बलिया का यह तेवर यहां के साहित्यकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, पंडित परशुराम चतुर्वेदी, डॉ.अमरकांत और डॉ. केदारनाथ सिंह की लेखनी में और पूर्व प्रधानमंत्री स्व.चन्द्रशेखर, जनेश्वर मिश्र की राजनीति में भी परिलक्षित होती है। समारोह में जागरूक संस्थान के कलाकार पंकज कुमार, छोटेलाल प्रजापति, विजय प्रकाश पाण्डेय, आशुतोष सिंह, सलोनी कुशवाहा, माया, अभय सिंह कुशवाहा, मृत्युंजय सिंह, सुमित कुमार ने अपनी प्रस्तुति दी।
बलिया जिले के जन्मदिन पर पुष्प अर्पित करते साहित्यकार शिवकुमार सिंह कौशिकेय साथ में अन्य।- फोटो : BALLIA