बलिया। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में व्यवस्थाएं सुधारने की कवायद के साथ ही तमाम दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर हालत बेहद खराब है। दिन में गर्मी बढ़ने और हीट वेब के कहर के बीच विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीज शाम तीन बजे के बाद और सुबह छह बजे के बाद जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
इनमें सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज पहुंच रहे हैं। तेज बुखार और अन्य बीमारियों से तड़पते मरीजों का तत्काल इलाज शुरू न कर इमरजेंसी में आधे घंटे बाद प्राथमिक इलाज शुरू हो रहा है। इस बीच मरीज की मौत हो जा रही है। परिजन चिकित्सक पर मरीज की मौत होने का इंतजार करने का आरोप लगा रहे हैं।
इमरजेंसी में चिकित्सक मरीज को चिकित्सकीय सुविधा न देकर परिजनों को पानी से शरीर पोछने की सलाह देकर दूसरे मरीजों की जांच पड़ताल में जुट जा रहे हैं। आधे घंटे बाद मरीज के जिंदा रहने पर उसके इलाज की प्रकिया शुरू कर रहे हैं। शहर के टैगोर नगर निवासी कुसुम देवी (48) को परिजनों ने तेज बुखार की समस्या होने पर इमरजेंसी में सुबह में भर्ती करवाया। वहां तैनात चिकित्सक और कर्मी चेकअप के बाद दूसरे मरीज का चेकअप करने लगे। इस बीच मरीज की मौत हो गई। इस तरह के मामले मरीजों की भीड़ बढ़ने पर ज्यादातर देखने को मिल रहे हैं।