जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहद खराब है। शासन के लाख प्रयास के बावजूद 24 घंटे चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। अधिकतर सीएचसी पर रात में प्रभारी व चिकित्सक नहीं ठहर रहे। हाल यह है कि जिले की अधिकतर सीएचसी पर दो बजे के बाद डाॅक्टर नहीं रहते। वार्ड ब्वाय या चतुर्थश्रेणी कर्मचारियों के भरोसे स्वास्थ्य केंद्रों की सारी व्यवस्था रहती है। जिन केंद्रों पर चिकित्सक रहते भी हैं, वहां मरीज को भर्ती न कर तुरंत रेफर कर दिया जाता है। पिछले दिनों परिवहन मंत्री के औचक निरीक्षण में स्वास्थ्य विभाग की कलई खुली थी, जिसमें चिकित्सक सहित 11 कर्मचारी सस्पेंड हुए थे।
राष्ट्रीय राज्य मार्गों पर बलिया-बैरिया एनएच-31 से सटे दुबहर सीएचसी पर लाखों रुपये खर्च कर प्रभारी ने आवास का जीर्णोद्धार करवाया। इसके बावजूद रात में यहां पर चिकित्सक नहीं रुकते। रात में आने वाले मरीजों को बलिया जाना पड़ता है। बैरिया-मांझी एनएच-31 पर स्थिति सोनबरसा सीएचसी पर चिकित्सक रहते हैं, लेकिन वह सड़क दुर्घटना या गम्भीर मरीज को भर्ती न कर रेफर कर देते हैं।
वैना, नरही, चिलकहर, रेवती, मनियर सहित अन्य सीएचसी की हालत भी ऐसी ही है। जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की चेतावनी के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों की चिकित्सकीय व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है। शासन का निर्देश सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह गया है। रात में ग्रामीणों की तबीयत खराब होने पर इलाज के लिए झोलाछाप चिकित्सक या कई किमी दूर जिला अस्पताल जाने को मजबूर होते है।
ग्रामीण क्षेत्रों की सीएचसी में 24 घंटे इमरजेंसी चलाने का निर्देश है। इसकी समय-समय पर जांच होती है। गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। इसके लिए सभी केंद्रों पर एंबुलेंस मौजूद रहती है। - डाॅ. जयंत कुमार, सीएमओ