विकास खंड सोहॉव के उजियार गंगा तट पर सतुआ संक्राति पर्व पर स्नान करते श्रद्धालु।
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बलिया/ लालगंज/ नरही। भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व मेष सक्रांति (बैशाखी) बुधवार को जनपद में आस्था व श्रद्धा के साथ मनाई गई। सुबह लोगों ने गंगा नदी के महावीर घाट, श्रीरामपुर घाट, भरौली घाट, उजियार घाट, पचरूखिया, मझौवा आदि घाटों पर स्नान कर दान पुण्य किया। तत्पश्चात लोगों ने सत्तू व गुड़ तथा सत्तू व नमक के साथ ही आम व इमली की चटनी संग सत्तू लुत्फ उठाया। आमबोलचाल की भाषा में सतुआन नाम से मशहूर इस त्योहार के दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। जिसके बाद एक माह से चल रहे खरमास का समापन हो जाएगा और मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाते है। आचार्य पंडित मिथिलेश दुबे बताते है कि भारतीय परंपरा में सूर्य की दो संक्रांतियां बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। ये दोनों संक्रांतियां खरमास के ठीक बाद पड़ती हैं। पहली खरमास बृहस्पति की राशि धनु से जब सूर्य मकर में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति होती है। इस दिन खिचड़ी का पर्व मनाया जाता है। दूसरी खरमास बृहस्पति की राशि मीन से जब सूर्य मेष में प्रवेश करते हैं तो इसे मेष संक्रांति कहते हैं। इस दिन सतुआन का पर्व मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार आज के दिन लग्न का कार्य भी शुरू हो जाता है।