बाढ़ विभाग ने पिछले वर्ष लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से बम्बूक्रेट विधि से कटान रोकने का कार्य कराया था। उसके बाद कन्हई ब्रह्म बाबा के स्थान से दक्षिण की ओर इसी वर्ष मई महीने में 10 करोड़ रुपये की लागत से रिवेटमेंट कार्य भी कराया गया था। इस कार्य का 400 मीटर हिस्सा शनिवार को गंगा में बह गया।
कटान पीड़ित पंकज तिवारी, सुमित उपाध्याय, नागेन्द्र तिवारी, शिवजी तिवारी, उदय सिंह, पूर्व प्रधान मनोज यादव, डा. राजेंद्र मिश्र आदि का कहना है कि कभी भी रिवेटमेंट एवं पार्कोपाईन विधि का कार्य गंगा के कटान में विलीन हो सकता है। बाढ़ विभाग फ्लड फाइटिंग पर उतर आया है।
एक्सईएन संजय कुमार मिश्र (बाढ़ विभाग, बलिया) ने कहा कि गोपालपुर गांव में गंगा नदी से कटान की सूचना मिलते ही बचाव का कार्य तेजी से शुरू कर दिया गया है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। आबादी को कोई नुकसान न पहुंचे, इसके लिए जेई को कटान स्थल पर निगरानी रखने का आदेश दिया गया है।
काश, बाढ़ विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों ने ग्रामीणों की बात सुनी होती तो यह दिन देखने को नहीं मिलता। कन्हई ब्रह्म बाबा का स्थान बच जाता। मई में जब कटान रोकने का कार्य हो रहा था उसी समय ग्रामीणों ने मांग किया कि कटिंग से लेकर उदई छपरा बस्ती तक भी ठोकर व पत्थर बिछाकर कटान को रोका जाए।
लेकिन बाढ़ विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने दुबे छपरा कटिंग से उदई छपरा तक पार्कों पाइन से कटान रोकने का प्रयास किया। लेकिन कार्तिक के महीने में शुक्रवार की रात्रि में गंगा की कटान ने इसे ध्वस्त कर दिया। गोपालपुर निवासी प्रभाकर तिवारी और प्रभुनाथ गुप्ता ने बताया कि बाढ़ के समय तो कटान रुका था पर इस कार्तिक के महीने में बाढ़ विभाग की लापरवाही से फिर कटान शुरू हो गया।
बैरिया तहसील अंतर्गत गोपालपुर, दुबेछपरा, उदई छ्परा सहित दर्जनों गांव के लोगों की आस्था के प्रतीक श्री कन्हई ब्रह्म बाबा का स्थान भी अब कटान की जद में आ गया है। बीती रात घटते जलस्तर के साथ ही कटान ने ऐसा तांडव मचाया कि लगभग 400 मीटर के दायरे में जमीन खिसककर गंगा में समाहित हो गया।