रामगढ़ में फ्लड फाइटिंग के तहत ठेकेदारों द्वारा भरी जा रही आधी अधूरी मिट्टी की बोरियां।
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गंगा में तेजी से हो रहा बढ़ाव को देखते हुए बाढ़ विभाग की ओर से डैमेज कंट्रोल का कार्य शुरू कर दिया गया है। विभाग पिछले कई दिनों से फ्लड फाइटिंग के तहत गंगा पार से नाव से बोरियों में बालू भरकर आधे-अधूरे हुए कटान रोकने कार्यों को बचाने में जुटा हुआ है। ये स्थिति तब है जब करोड़ों की लागत से कटान रोकने के लिए कार्य कराए जा रहे हैं।
रामगढ़ में पिछले साल एनएच-31 की सुरक्षा में बाढ़ विभाग के देखरेख में कार्यदायी संस्था की ओर से 27.500 किमी पर लगभग 11 करोड़ की लागत से बना स्पर के पूरब साइड नोज का कुछ हिस्सा जाली बोल्डर सहित गंगा की तेज धारा में पानी में बैठ गया था। विभाग समय रहते फिर जाली में बोल्डर डालकर मरम्मत नहीं करा पाया। जब गंगा में बढ़ाव होने लगा तो तत्काल पार्कोंपाइन विधि से उसे बचाने की कवायद शुरू हो गई है। गंगा के किनारे बसे लोगों का आरोप है कि विभाग मान चुका है कि परियोजनाओं के तहत जो भी कार्य कराए गए हैं वह गंगा के उग्र तेवर रोकने में काफी है।
चार सेमी प्रति घंटे कर दर से बढ़ाव
शनिवार को शाम चार बजे केंद्रीय जल आयोग गायघाट केंद्र पर गंगा का जल स्तर 54.94 मीटर था। गंगा का पानी चार सेमी प्रति घण्टा की दर से बढ़ना शुरू हो गया है। सुघर छपरा, दुबे छपरा, गोपालपुर में हो रहे कटानरोधी कार्य अभी आधे अधूरे होने से तटवर्ती लोगों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि 30 जुलाई तक कटानरोधी कार्य का पूरा नहीं होना विभाग और कार्यदायी संस्था पर सवालियां निशान खड़ा करता है। गंगा के पानी में तेजी से बढ़ाव जारी है। सुघर छपरा में कार्यदायी संस्था ने संसाधन के अभाव में आधा अधूरा कार्य करके छोड़ दिया है। कटानरोधी बचाव कार्य बाढ़ आने से पहले पूरा हुआ होता तो कटान से बचने की कुछ उमीदें थी। अब स्थिति और भयावह हो गई है।