बांसडीहरोड। रेलवे की जमीन के सीमांकन से अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। रेलवे विभाग की जमीन पर बढ़ते अतिक्रमण एवं आए दिन रेलवे की भूमि पर नए-नए भवन एवं मकान को देखते हुए रेलवे प्रशासन की ओर से नक्शे के आधार पर लाइन किनारे की अपनी जमीन को मापने के साथ सीमांकन की प्रक्रिया दिउली गांव से बांसडीह रोड के तरफ शुरू कर दी गई है।
रेल सूत्रों के अनुसार कई लोग रेलवे की भूमि के नजदीक वर्षों से भवन बनाकर रहते आ रहे हैं। कुछ वर्षो के अंतराल में रेलवे की जमीन के अतिक्रमण की समस्या विकराल रूप लेती जा रही थी। इसके कारण रेलवे प्रशासन द्वारा अपनी जमीन का सीमांकन कर निशान के रूप में खंभे गाड़े जा रहे हैं। साथ ही सीमांकन करके खंभों पर पटिया लगाकर घेराबंदी की जा रही है।
रेलवे की ओर से जमीन की मापी कर अपना निशान गाड़े जाने से रेलवे भूमि के नजदीक वर्षों से झुग्गी-झोपड़ी व मकान बनाकर रहने वाले लोगों में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार, रेलवे द्वारा नापी के दौरान रेल लाइन के मध्य से दोनों किनारों की मापी की जा रही है। इससे रेलवे की जद में आ रहे मकानों और झोपड़ी के भी टूटने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
जमीन मापी के बाद रेलवे प्रशासन की ओर से अतिक्रमणकारियों को नोटिस भी तामिला कराया जा सकता है। कहा जा रहा है कि रेलवे की ओर से समय-समय पर रेलवे की जमीन की मापी एवं सीमांकन कराया जाता है, ताकि जब रेलवे लाइन का विस्तारीकरण हो या रेलवे को किसी कार्यवश अपनी जमीन की आवश्यकता पड़ी तो रेलवे प्रशासन को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।