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शिकारियों ने मार डाला सैकड़ों गौरैया

Sun, 27 Mar 2016 11:26 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बलिया
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मरी हुई गौरैया ‌द‌िखाते लोग।
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वन विभाग गौरैया संरक्षण का अभियान चला रहा है और जिले के शिकारी बेखौफ होकर उनको मार रहे हैं। बांसडीहरोड थाने के माधोपुर गांव के बोहा ताल में रविवार की सुबह शिकारियों ने सैकड़ों गौरैयों को जहर देकर मार दिया। गांव वालों के सक्रिय होने पर शिकारी तमाम गौरैया समेट कर ले भागे जबकि मौके से 36 पंछियों को बरामद किया गया है। उनका शिकार खाने के लिए किया गया। 
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अज्ञात शिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मृत गौरैयो को अंत्य परीक्षण के लिए भेज दिया। माधोपुर गांव के बोहा ताल में अक्सर शिकारी कीटनाशक दवाएं देकर पंछियों का शिकार करते हैं। मांस कम होने के कारण अक्सर शिकारी गौरैया को निशाना नहीं बनाते लेकिन रविवार की सुबह उन्होंने सैकड़ों गौरैयों को मार डाला।

सुबह खेत में गए कुछ किसानों ने मरे हुए गौरैयों को देख कर शोर मचाना शुरू कर दिया। गांव के लोगों को जुटने से पहले ही शिकारी दूसरी तरफ मृत पड़ी ज्यादातर गौरैयों को समेट कर ले भागे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहा है कि शिकार करने वाले किशोरवय के थे। प्रधान प्रतिनिधि सुधीर चौधरी, बृजकिशोर चौरसिया, नदेश्वर गुप्त, मंजीत, रविशंकर, पप्पू, वृजेंद्र प्रसाद, दीपक, राजू इसकी सूचना पुलिस को दी और वन विभाग को भी फोन किया।
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डीएफओ एसएन सिंह के निर्देश पर कुछ ही देर फारेस्ट रेंजर श्रीकांत राय एवं वन दारोगा के साथ मौके पर पहुंचे।  वहां से 36 मृत गौरैया बरामद की गईं। उनको पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गा। इस मामले में  फारेस्ट रेंजर की तहरीर पर अज्ञात शिकारियों के विरूद्ध वन जीव संरक्षण अधिनियम धारा नौ तथा 51 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के प्रभारी निरीक्षक नंदलाल ने बताया कि शिकारियों का पता लगाया जा रहा है।
 

पंछियों को पकड़ने के लिए शिकारी जिस जहर का इस्तेमाल करते हैं, वह धीमा होता है। उससे शुरुआत में मनुष्य को नुकसान नहीं होता लेकिन ज्यादा समय तक ऐसे पंछियों को खाने से किडनी प्रभावित हो सकती है।


फारेस्ट रेंजर श्रीकांत राय ने बताया कि शिकारी पंछियों को इतना ही जहर देते हैं, जिससे वे बेहोश हो जाएं। जहर की मात्रा ज्यादा होने के कारण गौरैयों की जान चली गई। उन्होंने गौरैयों को खाने की बात स्वीकार की और कहा कि इसके ज्यादा सेवन से किडनी प्रभावित हो सकती है। नगर पशु चिकित्सा अधिकारी डा. एके श्रीवास्तव ने बताया कि जहर देकर मारे गए पक्षी के सेवन से किसी की जान तो नहीं जाती लेकिन लंबे समय ऐसे पक्षियों के सेवन से किडनी नष्ट हो जाती है।
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