प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद जनपद में कच्ची शराब के धंधे पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। इसके सेवन से आए दिन परिवार उजड़ रहे हैं। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो बीते कुछ सालों मेंें 100 से अधिक लोग कच्ची शराब पीने से काल के गाल में समा चुके हैं। जिले में रेवती, हनुमानगंज, सिकंदरपुर के इलाके ज्यादा प्रभावित हैं, इन्हीं क्षेत्रों में कच्ची शराब के पीने से तमाम लोगों की मौत हो चुकी हैं। आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते इस पर अंकुश नहीं लग पाया है।
जिले में कच्ची शराब की बिक्री पर भले ही प्रतिबंध लगा है, बावजूद इसके इसका धंधा जोरों से फलफूल रहा है। इस धंधे पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने कोई ठोस पहल अब तक नहीं की है। जिस कारण शराब कारोबारियों के हौसला बुलंद हैं। रेवती, मनियर, सहतवार, सुखपुरा, बेल्थरारोड, बांसडीह, बैरिया, सिकंदरपुर क्षेत्र के दियारा, सीसोटार, लीलकर, खरीद, कथौड़ा, डूहाबिहरा, बसंतपुर, दया छपरा सहित अन्य गांव शामिल हैं।
इन जगहों पर शराब कारोबारी पुलिस एवं आबकारी विभाग से मिलीभगत कर खुलेआम कच्ची शराब बनाते हैं और बेचते हैं। त्रिस्तरीय पंचायत के दौरान सुखपुरा थाना क्षेत्र के धरहरा गांव में ग्राम प्रधानी चुनाव में प्रधान प्रत्याशियों ने मतदाताओं को पक्ष में करने के लिए बाटी-चोखा की दावत थी। जिसमें कच्ची शराब को लोगों ने छक कर पिया था। शराब पीने के अगले दिन ही कुंदन प्रसाद गुप्ता, राम बिंद एवं केशव प्रसाद बिंदु की हालत बिगड़ गई।
अभी परिवार के सदस्य कुछ समझ पाते कि कुछ ही देर में इनकी मौत हो गई थी, जबकि 26 अन्य गंभीर रूप से बीमार भी हो गए थे। जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस मामले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अनीस अहमद ने सुखपुरा एसओ और हनुमानगंज चौकी इंचार्ज को निलंबित कर दिया था। इस दौरान तत्कालीन एसपी ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए इस पर रोक लगा दिया था। लेकिन उनके स्थानांतरण होते ही यह धंधा पूर्व की भांति चलने लगा।
80 को भेजा जेल, 280 पर मुकदमा दर्ज
जिले में ड्रग्स के नाम पर हीरोइन, गांजा एवं अजर्निया को लोग पीते है। आकड़ों पर गौर करें तो एक अप्रैल 2015 से अब तक 411 स्थानों पर छापेमारी की गई है। जिसमें 6483 लीटर अवैध शराब पकड़ी जा चुकी है। 80 लोगों को जेल भेजा जा चुका है, जबकि 280 लोगों पर आबकारी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आबकारी अधिकारी भुआल सिंह ने बताया कि अवैध रूप से बिक रही शराब का रोकने के लिए जिले में अभियान चलाकर छापेमारी की जाती है।