सांसद आदर्श गांव कुशहर में प्रधानमंत्री आवास आवंटन में फर्जीवाड़ा करने के मामले में पीडी ने प्रधान, सचिव, सेक्टर अधिकारी के अलावा संबंधित बैंक के शाखा प्रबंधक तथा फर्जी खोलवाने वाले सात लोगों पर मुकदमा दर्ज कराने का आदेश रेवती के बीडीओ को दिया है। पीडी ने इस फर्जीवाड़ा में प्रधान, सचिव आदि की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए कार्रवाई की है। अमर उजाला ने आठ अगस्त के अंक में इसका खुलासा किया था।
डीआरडीए के पीडी ने माना है कि रेवती ब्लाक के कुशहर गांव के 40 लाभार्थियों के आवास की स्वीकृति दी गई है। इसमें सात लाभार्थियों के नाम तथा वल्दियत समान रखते हुए गलत आईडी प्रस्तुत कर खाता खोलवा कर लाभ लेने की कूट रचना की गई है। यह संगठित आर्थिक अपराध के तहत सरकारी धन के दुरुपयोग करने के दोषी हैं। प्रधानमंत्री आवास आवंटन में पात्रता का सत्यापन तथा अभिलेखीकरण की पूरी जिम्मेदारी संबंधित सचिव की होती है।
इस मामले में तत्कालीन सचिव की ओर से तत्परता बरती गई होती तो लाभार्थियों के नाम पर कूटरचना और फर्जी अभिलेख के आधार पर लाभार्थी के प्रोफाइल फीडिंग से बचा जा सकता था। ऐसे में सचिव की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत होती है।
इसके अलावा लाभार्थियों की ओर से 11 जुलाई को ही शिकायत कर प्रधान तथा सचिव पर इस तरह का आरोप लगाया था, लिहाजा प्रधान की भी भूमिका संदिग्ध है। पीडी ने माना है कि संगठित तरीके से सरकारी धन के दुरुपयोग की गई है।
इस मामले में प्रधान, सचिव, सेक्टर अधिकारी, संबंधित बैंक के शाखा प्रबंधक तथा सात लाभार्थियों के नाम से खाता खोलने वालों के खिलाफ मुकदमा कराते हुए अवगत कराएं। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।