बलिया। जिलाधिकारी सुरेन्द्र विक्रम ने 200 गांवों में मनरेगा के तहत कोई कार्य शुरू नहीं होने के बाबत कार्रवाई का निर्देश देते हुए सभी बीडीओ को चेतावनी दी है। डीएम ने जहां रोजगार सेवकों को मानदेय रहित करने को कहा है वहीं संबंधित प्रधान और सचिव पर एक-एक हजार का अर्थदंड लगाने को कहा है। इसको लेकर संबंधित ग्राम पंचायतों में खलबली मची है।
जिले में मनरेगा कार्य को लेकर काफी उदासीनता बरती जा रही है। शासन की ओर से वित्तीय वर्ष 2017-18 के मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है लेकिन वित्तीय साल का एक चौथाई यानि तीन माह बीत जाने के बाद भी जिले के 196 ग्राम पंचायतों में यह स्थिति शून्य है। कुछ दिन पहले शासन स्तर पर हुई मॉनीटरिंग में यह जानकारी सामने आई तो ग्राम्य विकास विकास मनरेगा की ओर से श्रम एवं रोजगार मनरेगा के उपायुक्त तथा जिलाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा। इसको लेकर डीएम ने जिले स्तर पर मॉनीटरिंग कराई तो कमोवेश सभी ब्लाकों के कुछ गांवों में मनरेगा के तहत मानव दिवस सृजन की स्थिति शून्य मिली। डीएम ने इस बाबत सभी बीडीओ को पत्र जारी किया है। उन्होंने बताया है कि उनके प्रभावी नियंत्रण नहीं होने के कारण गांवों में अप्रैल से जून महीने तक मनरेगा के तहत मानव दिवस सृजन में सचिव, प्रधान तथा रोजगार सेवकों ने लापरवाही की है। चेताया है कि इसकी पुनरावृत्ति होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित कर दी जाएगी। डीएम ने सभी बीडीओ को बताया कि गांवों में मनरेगा कार्य में लापरवाही बरतने वाले सचिव, प्रधान तथा रोजगार सेवक को सुनवाई का मौका देते हुए अपने स्तर से उक्त महीने में रोजगार सेवकों को मानदेय रहित और प्रधान तथा सचिव पर मनरेगा एक्ट की धारा 25 के तहत एक हजार का दंड निर्धारित कर उसकी वसूली करें।
इनसेट...
जिले के 200 ग्राम पंचायतों में वर्ष 2017-18 के तहत कोई मानव दिवस का सृजन नहीं किया गया है। बार-बार निर्देश के बावजूद ग्राम पंचायतों की ओर से लापरवाही की गई है। इस बाबत कार्रवाई के लिए डीएम की ओर से सभी बीडीओ को निर्देश दिया गया है।
यूके पाठक
उपायुक्त, श्रम एवं रोजगार मनरेगा