फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

11 मौजे में तथ्यों को छिपाकर किए गए नामांतरण निरस्त

विज्ञापन
विज्ञापन
बलिया। सदर तहसील के भरौली गांव के एक किसान के 11 मौजों में तथ्यों को छिपाकर किए गए नामांतरण को एसडीएम ने निरस्त कर दिया है। एसडीएम ने यह कार्रवाई तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के आधार पर की है। अमर उजाला ने इस मामले का खुलासा 13 अगस्त के अंक में किया था और 22 अगस्त के अंक में जांच के बावत कई सवाल भी उठाए थे।
विज्ञापन

लाख कवायद के बावजूद जिले में भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। आलम यह है कि आज भी तहसीलों में राजस्वकर्मी अपनी मनमानी कर रहे हैं। सोहांव ब्लाक के भरौली गांव निवासी सिद्धनाथ राय का विवाद उनके पट्टीदार से है। उनके दो सगे भाईयों नारदमुनी व शंभूनाथ के निधन के बाद से नामांतरण को लेकर पट्टीदार से विवाद तहसीलदार कोर्ट में चल रहा है। इसी दौरान कुछ दिनों पहले राजस्वकर्मियों ने मनमानी करते हुए तथ्यों को छिपा कर नामांतरण कर दिया। इसकी जानकारी होने पर पीड़ित सिद्धनाथ राय ने डीएम को शिकायती पत्र देकर बताया था कि परगना गड़हा क्षेत्र राजस्व निरीक्षक सोहांव के तहत आते हैं जबकि नामांतरण राजस्व निरीक्षक फेफना के आदेश से कुल मौजों में तथ्यों को छिपा कर किया गया है। पीड़ित ने कुल पांच लेखपालों पर आरोप लगाए। मामले की जब पड़ताल शुुरु हुई तो दो लेखपालों ने तहसीलदार को लिखित अवगत कराया कि यह नामांतरण गलत है और यह खारिज करने योग्य है। इस बाबत एसडीएम ने तहसीलदार से जांच कर पूरी रिपोर्ट मांगी और कार्रवाई करने का निर्देश दिया। तहसीलदार ने रिपोर्ट में माना कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है और राजस्व निरीक्षक फेफना का आदेश गलत है। एसडीएम के निर्देश पर तहसीलदार ने जांच के बाद तथ्यों को छिपा कर किए नामांतरण को निरस्त कर दिया और इसकी इंट्री भी सभी 11 मौजे के खतौनी में कराई गई।
इनसेट...
आखिर कब पकड़ा जाएगा फर्जीवाड़ा का मास्टर माइंड
बलिया। डीएम के आदेश और एसडीएम के कड़े तेवर के चलते भले ही भरौली के किसान को त्वरित न्याय मिल गया लेकिन फर्जीवाड़ा का मास्टर माइंड कब पकड़ा जाएगा, यह सवाल अभी भी बना हुआ है। बताया जाता है कि तथ्यों को छिपाकर नामांतरण करने के मामले में पीड़ित ने पांच लेखपालों पर आरोप लगाए थे। दो लेखपालों ने तो लिखित तौर पर अधिकारियों को बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है और उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। लेकिन तीन लेखपालों ने चुप्पी साध ली। सवाल उठता है कि आखिर इन तीन लेखपालों की भूमिका की जांच कब होगी? यह तय हो गया कि आदेश गलत था तो कानूनगो फेफना और अन्य लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
विज्ञापन

इनसेट...
पहले भी कई मामले आए सामने, पर दब गए
बलिया। सदर तहसील में सालों से फर्जी तरीके से नामांतरण का खेल चल रहा है। करीब एक साल पहले भी दुबहड़ क्षेत्र के नगवां गांव के संजय पाठक के जिंदा रहते ही उन्हें मृत दिखाकर नामांतरण किया गया। पड़ताल में सामने आया कि दुबहड़ कानूनगो के रहने के बावजूद यह खेल फेफना के कानूनगो के आदेश तथा तत्कालीन लेखपाल ने किया है। हालांकि एक अन्य मुकदमे के कारण खतौनी से नाम खारिज हो गया लेकिन साक्ष्य आज भी तहसील में मौजूद है। इसके अलावा भरौली तथा उजियार में भी बड़े पैमाने पर धांधली की गई है। सही तरीके से जांच हो तो कई मामले का खुलासा हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें