बलिया। प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद जनपद के प्रांतीय सीमा बैरिया व भरौली के रास्ते लाल बालू की तस्करी काफी तेज हो गई, जो आज भी बदस्तूर जारी है। इसको लेकर समय-समय पर ग्रामीणों की ओर से आवाज भी उठाए गए, लेकिन तस्करी पर कोई लगाम नहीं लग सका। बिहार के कोइलवर खदान से नजदीकी इलाका होने के कारण भरौली गंगापुल से लाल बालू की तस्करी सबसे अधिक होती है। उधर, बैरिया इलाके के पुल से द्वाबा में लाल बालू का काला खेल भी चरम पर है। बैरिया विवाद में चालक अरिजीत सिंह के ऊपर करीब डेढ़ माह पहले भरौली क्षेत्र में भी वसूली के आरोप लगे थे, लेकिन शिकायतों को अफसरों ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था। सूत्रों की माने तो प्रवर्तन दल के वनकर्मी महज कुछ वाहनों के रसीद काटकर अन्य गाड़ियों से वसूली का धंधा करते हैं। इसी को लेकर आए दिन विवाद भी होता रहा है