बलिया। खनन विभाग में सालों से जमे बाबुओं की मिलीभगत से जिले के विभिन्न इलाके में धड़ल्ले से अवैध खनन किए जाते हैं। खनन माफियाओं से मिलीभगत कर करोड़ों की संपत्ति भी तैयार कर लिए हैं। अधिकारी भी इस बावत कोई कार्रवाई नहीं करते और धरपकड़ के नाम पर केवल कोरम ही करते हैं।
जिले में अवैध खनन बदस्तूर जारी है और इस पर लगाम लगाने की सभी कवायदें फेल हैं। बताया जाता है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर करीब 10 सालों से खनन पट्टे पर रोक लगी हुई है। लेकिन इसके बावजूद गंगा, घाघरा और टोंस नदी के तटवर्ती इलाकों में अवैध खनन का काम होता रहा जो आज भी जारी है। गंगा किनारे स्थित कोटवां नारायनपुर, नसीरपुर मठ, सरयां, भरौली, सोहांव, कोट अंजोरपुर, बड़काखेत आदि के अलावा शहर से सटे महावीर घाट, हल्दी आदि से लेकर बैरिया तक का इलाका अवैध खनन के लिए कुख्यात है। इसके अलावा घाघरा किनारे के लिलकर, सीसोटार, कठौड़ा आदि दर्जनों गांवों के पास अवैध खनन कर सफेद बालू को डम्प कर बेचने का काम किया जाता है।
इसे रोकने के लिए बाकायदे खनन विभाग भी स्थापित है लेकिन अधिकारियों की ओर से कभी भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। जांच के नाम पर केवल उन्हीं वाहनों को पकड़ा जाता है जो उनकी ‘सेटिंग’ से बाहर के होते हैं। अवैध खनन रोकने के लिए जिला प्रशासन की ओर से भी संबंधित एसडीएम, तहसीलदार व थानाध्यक्ष को निर्देश दिया जाता है लेकिन यह भी केवल कागजों तक ही सीमित रहता है। आलम यह है कि खनन पटल पर सालों से जमे बाबुओं की मिलीभगत से यह गोरखधंधा बदस्तूर जारी है और हर महीने करोड़ों का वारा न्यारा किया जाता है।
अवैध खनन रोकने के बाबत सभी थानाध्यक्ष व एसडीएम को निर्देश जारी किया गया है। शासनादेश के तहत एक ही पटल पर जमे बाबूओं की सूची तैयारी कराई जा रही है, यदि अवैध खनन मामले में किसी भी बाबू अथवा अधिकारी की संलिप्तता पाई गई तो अवश्य ही कार्रवाई होगी।
= मनोज कुमार सिंघल, अपर जिलाधिकारी, बलिया