बलिया। विकास खंड दुबहर के ग्राम पंचायत दोपही में रोजगार सेविका की फर्जी नियुक्ति का मामला प्रकाश में आने के बाद अभी विभाग उसमें कार्रवाई में जुटे ही थे कि, अमर उजाला के हाथ एक और दस्तावेज उपलब्ध हुआ। जिसमें गजियापुर में लगभग पांच वर्षों से काम छोड़ चुके रोजगार सेवक को दुबहर ब्लाक के बाबू द्वारा घर बैठे भुगतान किया जा रहा है। सूत्र की मानें तो फर्जी नियुक्ति का इस तरह का मामला तो दुबहर ब्लाक बानगीभर है। अगर मामलों की जांच कराई गई तो बहुत बड़ा खेल सामने आ सकता है!
दोपही में भी फर्जी नियुक्ति का मामला अमर उजाला ने बीते सात जुलाई के अंक में प्रकाशित किया था। जिसके बाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 27 जुलाई 2017 को रोजगार सेविका से रिकवरी का आदेश दिया। अभी ये मामला ठंडा नहीं पड़ा था कि गजियापुर का फर्जीवाड़ा सामने आ गया। दस्तावेज के अनुसार विकास खंड दुबहर से दिनांक एक जनवरी 2012 से 31 मार्च 14 के मध्य 40 रोजगार सेवकों की तैनाती दिखाकर 11.85 लाख रुपये निर्गत किया गया। जिसमें गजियापुर में न तो तैनाती थी और न ही उनको मानदेय का भुगतान किया गया। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2016-17 में मानदेय का भुगतान किया गया है। ऐसे में एक सवाल क्या जो आदमी काम छोड़ चुके हैं, क्या उनको घर बैठे दाम मतलब मानदेय मिल सकता है। लेकिन ऐसा हुआ है, बाबू की करामत से बिना काम के भी यहां दाम मिल रहा है।
कोट
दुबहर ब्लाक के दोपही में फर्जी नियुक्ति मामले में जिस तरह रिकवरी का आदेश हुआ है। उस तरह गजियापुर भी पांच साल बाद किसके आदेश पर बाबू तैनाती दिखाकर भुगतान किया है। उसकी जांच कराकर कठोर कार्रवाई की जाएगी। दस्तावेज देखने के बाद फर्जीवाड़ा की पुष्टि हो गई है। इसमें दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उपेंद्र कुमार पाठक, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार मनरेगा