हाकिम दलित होना क्या गुनाह है!
मानदेय के लिए रोजगार सेवकों ने सीएम को भेजी पाती
मानदेय भुगतान में भेदभाव का लगाया आरोप
बलिया। हाकिम दलित होना क्या गुनाह है! अगर नहीं तो फिर हम रोजगार सेवकों के मानदेय भुगतान में आखिर भेदभाव क्यों बरता जा रहा है? ये कहना है रोजगार सेवक लक्ष्मण प्रसाद और मनोज कुमार का जो शनिवार को सीएम को पत्र भेज जातिगत प्रताड़ना तथा उपेक्षा की शिकायत की है।
पत्र में आरोप लगाया कि प्रार्थी लक्ष्मण प्रसाद (सांसद गांव ओझवलिया के रोजगार सेवक), मनोज (जनाड़ी के रोजगार सेवक) ने आरोप लगाया कि हम दोनों की तैनाती दुबहर ब्लाक में है। बीते दिनों शासन से मानदेय रिलीज होने के बाद ब्लाक के समस्त रोजगार सेवकों के खाते में आठ माह का मानदेय भेज दिया गया। जबकि उन दोनों का मानदेय अभी तक नहीं मिला। इस संबंध में बाबू से पूछा तो उन्होंने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते कहा कि जहां शिकायत करनी हो कर लो, कोई फर्क नहीं पड़ता।
दोनों रोजगार सेवकों ने सीएम को लिखे पत्र में आरोप लगाते हुए आगे लिखा कि स दलित होने के नाते दोनों को ब्लाक के अधिकारियों द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। इतना ही नहीं बाबू द्वारा उक्त अतिरिक्त ग्राम पंचायत में साजिश के तहत सजातीय रोजगार सेविका की तैनाती दिखाकर वर्षों से मानदेय का बंदरबांट भी किया जाता है। जिसकी शिकायत उनके द्वारा जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक, खंड विकास अधिकारी को पत्र देकर अवगत कराया गया। लेकिन कोई भी कार्रवाई आज तक नहीं की गई।
मानदेय की धनराशि संबंधित ब्लाक में भेज दी गई है। अगर किसी के खाते में नहीं गई है तो ये बात गलत है। रही बात दलितों की उपेक्षा की तो मैं दुबहर ब्लाक के संबंधित बाबू के खिलाफ जांच करवाकर कठोर कार्रवाई करूंगा।
उपेंद्र कुमार पाठक
उपायुक्त (श्रम एवं रोजगार मनरेगा)