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सात साल बाद भी कार्रवाई नहीं

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बलिया। नगरा ब्लाक के खैरानिस्फी गांव के एमडीएम में हुए गोलमाल के मामले में सात साल बाद भी अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वर्ष 2010 में बीएसए ने जांच में 55.28 कुंटल अनाज व 83 हजार 255 रुपए का गबन मानते हुए कार्रवाई के लिए डीपीआरओ को रिपोर्ट भेजी थी। इसके अलावा तत्कालीन बीडीओ ने पंचायत भवन में निर्माण में 2.84 लाख का गोलमाल मानते हुए रिकवरी की संस्तुति की थी। यह दोनों जांच आज भी डीपीआरओ कार्यालय में जहां धूल फांक रही है, वहीं आला अफसर इस मामले में केवल निर्देश देकर कोरम कर रहे हैं।
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वर्ष 2010 में नगरा ब्लाक के सोनाड़ी गांव निवासी इंद्रजीत तिवारी ने अधिकारियों को शिकायती पत्र देकर बताया कि खैरानिस्फी गांव में प्रधान व सचिव की मिलीभगत से एमडीएम के खाद्यान्न व कन्वर्जन मनी में धांधली की गई है। श्री तिवारी ने सितम्बर 2005 से सितम्बर 2010 के बीच प्रधान व सचिव के दौरान संचालित एमडीएम की जांच कर कार्रवाई की मांग की। तत्कालीन डीएम के निर्देश पर तत्कालीन बीएसए एमपी सिंह कुशवाहा ने मामले की जांच एमडीएम के जिला समन्वयक अजीत पाठक से कराई। जांच में सामने आया कि 55.28 कुंतल एमडीएम के खाद्यान्न का गोलमाल किया गया है और बतौर कन्वर्जन मनी 83 हजार 255 रुपए का गबन किया गया है। इसके बाद बीएसए ने प्रधान व सचिव से खाद्यान्न व गबन की धनराशि की रिकवरी करने व विधिक कार्रवाई के लिए 23 अक्टूबर 2010 को डीपीआरओ को जांच रिपोर्ट भेजी। उधर, डीएम के रिपोर्ट पर नगरा ब्लाक के तत्कालीन बीडीओ ने जांच में पाया कि पंचायत भवन निर्माण के लिए 2.84 लाख का आहरण किया गया है लेकिन इसका उपयोग पूरी तरह नहीं किया गया है। तत्कालीन बीडीओ ने इस धनराशि की रिकवरी भी प्रधान व सचिव करने की संस्तुति की थी।
सीडीओ संतोष कुमार का कहना है कि यह मामला उनके कार्यकाल के पहले का है लिहाजा पूरी जानकारी नहीं है। लेकिन यह मामला संगीन है और जल्द ही इस प्रकरण में डीपीआरओ से रिपोर्ट मंगाकर कार्रवाई की जाएगी।
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