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दहेज हत्या मे पति को दस साल की कैद

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बलिया। दहेज हत्या के मामले में न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम चंद्रभानू सिंह की अदालत ने पति को 10 वर्ष का सश्रम कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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अभियोजन कथन के अनुसार, देवरिया जनपद के बांसगांव निवासी जहांगीर ने 18 जून 2002 को रसड़ा कोतवाली में तहरीर में उल्लेख किया था कि उसकी बहन तलक आरा की शादी 23 जनवरी 2000 को मजहर मोबिन पुत्र मुनजलीम मुहल्ला पुरानी कोट मल्लाह टोली रसड़ा के साथ हुई थी। शादी में अपने सामर्थ्य से अधिक दहेज दिया था। शादी के बाद बहन अपने ससुराल गई। ससुराल में पति द्वारा बाइक की मांग को लेकर बहन को प्रताड़ित किया करते थे। इसी बात को लेकर 30 मई 2002 की सुबह करीब पांच बजे बहन के घर के पड़ोसी से टेलीफोन द्वारा सूचना मिली कि बहन के शरीर पर केरोसिन उड़ेल कर ससुराल वालों ने जला दिया है। वह गंभीर रूप से झुलस गई है। पड़ोसी की सूचना पर जिला अस्पताल पहुंचे। जहां से चिकित्सक ने स्थिति नाजुक देख उसे वाराणसी रेफर कर दिया था। वाराणसी में इलाज के दौरान उसे आठ माह की पुत्री पैदा हुई और कुछ समय बाद बच्ची मर गई। इसके बाद सात जून 2002 को बहन ने भी वाराणसी अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस मामले में पति समेत चार लोगों को मुजरिम बनाया गया था। इस मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने जावेद अख्तर, गुलाम रब्बानी, गुडिय़ा उर्फ साजिदा पत्नी जावेद अख्तर को बरी कर दिया, जबकि पति मजहर मोबिन को 10 साल की सजा सुनाते हुए 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
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