दो अलग-अलग विद्यालयों के एक सहायक अध्यापक व एक प्रधान लिपिक को अनियमित वेतन व अवशेष भुगतान के मामले में दो डीआईओएस, जिविनि कार्यालय के दो लेखाकार के अलावा अब दो वरिष्ठ लिपिक भी फंस गए हैं। अपर शिक्षा निदेशक ने जंगली बाबा इंटर कालेज के प्रबंध समिति को अतिक्रमित करते हुए सीडीओ बलिया को प्राधिकृत नियंत्रक नियुक्त करने की संस्तुति के साथ ही सहायक अध्यापक की सेवा समाप्त करने को उचित माना है। अमर उजाला ने 10 दिसंबर के अंक में इसका खुलासा किया था। इसके बाद से जांच होती गई और परत दर परत खुलती गई।
भाजपा के राष्ट्रीय परिषद के पूर्व सदस्य व गड़वार गांव निवासी जंगली बाबा इंटर कॉलेज के सहायक अध्यापक के खिलाफ मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। शासन की ओर से कराई गई जांच में कई गड़बडिय़ां सामने आईं और जांच में डीआईओएस ने माना कि जंगली बाबा इंटर कॉलेज के सहायक अध्यापक संजय सिंह की सेवा 30 जून 2008 के बाद अनियमित होने के बावजूद वेतन व अवशेष का भुगतान किया गया। जिविनि की रिपोर्ट पर शिक्षा निदेशक माध्यमिक इलाहाबाद ने किए गए 21 लाख 51 हजार 827 रुपये के भुगतान के लिए तत्कालीन डीआईओएस रमेश सिंह, वर्तमान डीआईओएस अमर नाथ राय, लेखाधिकारी कलीम अहमद व विपुल कुमार सिंह के अलावा जिविनि कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक वीर बहादुर यादव व अनिरुद्ध आर्य को दोषी माना है। इस मामले में सिंह को गैर विभाग में बिना वेतन प्राप्त किए प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के मामले में प्रबंध तंत्र को दोषी माना गया था। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने जंगली बाबा इंटर कॉलेज के प्रबंध समिति को अतिक्रमित करते हुए सीडीओ बलिया को प्राधिकृत नियंत्रक नियुक्त करने की भी संस्तुति की है। उन्होंने शिक्षा निदेशक माध्यमिक को भेजी रिपोर्ट में सहायक अध्यापक सिंह की सेवा समाप्ति को भी उचित माना है।
इसी तरह बाबा लक्ष्मण दास द्वाबा राष्ट्रीय इंटर कॉलेज के प्रधान लिपिक श्याम सुंदर उपाध्याय की सेवा समाप्ति के अनुमोदन के बाद वेतन व अवशेष भुगतान के मामले की जांच शासन ने कराई। इसमें सामने आया कि शासन ने इस प्रकरण की जांच का निर्देश तत्कालीन डीआईओएस को दिया था। डीआईओएस ने इस प्रकरण की जांच के लिए 31 मार्च 17 को दो सदस्यीय समिति बनाई। लेकिन इस बाबत जांच समिति ने बताया कि उन्हें कोई पत्र नहीं मिला है। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने माना कि तत्कालीन डीआईओएस रमेश सिंह ने प्रधान लिपिक से मिलकर केवल कागजी कोरम किया और भुगतान होता रहा। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक इलाहाबाद ने प्रधान लिपिक को किए गए तीन लाख 84 हजार 855 रुपये के मामले में उक्त दोनों डीआईओएस, दोनों लेखाकार व जिविनि कार्यालय के दोनों वरिष्ठ लिपिक को दोषी माना है।