दोकटी के धतूरी टोला गांव में 10 वर्ष पहले हुई मारपीट में दो लोगों की हत्या में अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अश्विनी कुमार सिंह की अदालत ने दोनों पक्षों के 11 आरोपियों को उम्रकैद और 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड दिया है। विवाद आम तोड़ने को लेकर हुआ था।
धतूरी टोला निवासी बद्री वर्मा ने दोकटी थाने में मुकदमा पंजीकृत कराया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि 11 जून 2005 की सुबह सात बजे वादी के घर के सामने गांव के सोनू सिंह व उसके तीन साथी पत्थर मारकर आम तोड़ रहे थे। पत्थर बार-बार घर की तरफ आ रहा था जिससे चोट लगने की आशंका थी।
वादी के पुत्र टुना ने जब उन्हें ऐसा करने से मना किया तो सोनू सिंह ने उसकी पिटाई कर दी। बकौल वादी, जब मैंने बीच-बचाव किया तो सोनू सिंह के घर वाले (सोनू सिंह, चुन्नू सिंह, गंगेज सिंह, उमेश सिंह, योगेंद्र, रिंकी उर्फ मनीष, चुलबुल सिंह, अनिल सिंह, सत्येंद्र सिंह, दिनेश सिंह) वादी के परिवार के अशोक वर्मा व पिंटू वर्मा को घेरकर लाठी-डंडे से मारने लगे। उन्होंने फायरिंग भी की।
बाद में गंभीर रूप से घायल टुना की मौत हो गई थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने चार आरोपियों गंगेज सिंह, चुलबुल सिंह, दिनेश सिंह और योगेंद्र सिंह को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड लगाया, जबकि सोनू, चुन्नू, अनिल और सत्येंद्र को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। विचारण के दौरान उमेश सिंह की मृत्यु हो गई, जबकि रिंकी उर्फ मनीष को कोर्ट ने किशोर घोषित कर दिया। उसपर फैसला किशोर न्याय बोर्ड में किया जाएगा।
उधर, इस मामले के क्रास केस के वादी सोनू सिंह ने भी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि वादी का चचेरा भाई रूपेश कुमार मजदूर बुलाने जा रहा था। इसी दौरान 11 जून 2005 की सुबह आम तोड़ने के विवाद में कृष्णा मौर्य ने उसे गालियां दीं और पिटाई कर दी। रूपेश ने घर आकर जब पूरी बात बताई तब वादी, रूपेश सिंह, अभय शंकर पूछताछ करने कृष्णा के घर गए। इससे नाराज कृष्णा मौर्य, बद्री मौर्य, अवधेश, मोहन, राजेश, चांदमुनि बिंद, श्याम बिहारी ने मिलकर लाठी-फरसे से प्रहार कर दिया।
इस दौरान अभय शंकर को राजेश ने तमंचे से गोली मार दी। उसे घायलावस्था में सोनबरसा अस्पताल ले जाया गया जहां डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मामले में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए सभी सात आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी हर्ष नारायण प्रसाद और बचाव पक्ष से शंभूनाथ उपाध्याय ने पैरवी की।