बलिया। प्रधानमंत्री आवास के आवंटन में शुरू से ही लापरवाही बरती गई और कागजों पर ही कोरम किया जाता रहा। लाभार्थियों के सत्यापन व चयन में भी खूब मनमानी की गई और अधिकारी शिकायतों को भी नजरअंदाज करते रहे। अब एक-एक कर कलई खुलने लगी है।
जिले आवास योजनाओं में धांधली रुक नहीं रही। आवंटन से लेकर किश्त तक भेजने में अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही बदस्तूर जारी है। 2016-17 में शासन की ओर से 9810 प्रधानमंत्री आवास का आवंटन जिले के लिए किया गया। इसके बाद वर्ष 2017-18 के लिए कुल 5366 आवास का लक्ष्य निर्धारित किया गया। लेकिन पात्रों के नहीं मिलने के कारण वर्ष 2017-18 के 735 आवासों का धन सरेंडर कर दिया गया। बताया जाता है कि शासन की ओर से निर्धारित मानकों को नजरअंदाज करते हुए ब्लाक स्तरीय अधिकारियों की मिलीभगत से आवासों का आवंटन कर दिया। इसमें सैकड़ों ऐसे लाभार्थी भी हैं जो सालों पहले के इंदिरा आवास आदि का लाभ ले चुके हैं। बतौर उदाहरण सीयर ब्लाक के हल्दी रामपुर गांव के ग्रामीणों ने आवंटित 45 में से 32 लाभार्थियों के अपात्र होने की शिकायत अधिकारियों से की है।
इसी तरह सोहांव ब्लाक के अधिकांश गांवों में यह खेल धड़ल्ले से किया गया है और शिकायतों के बावजूद अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा सांसद आदर्श गांव कुशहर में सात लाभार्थियों के नाम से फर्जी खाता खोलवाकर प्रथम किश्त का आहरण कर लिया गया और अधिकारियों ने मुकदमा दर्ज कराकर कोरम पूरा किया। दुबहड़ ब्लाक के घोड़हरा गांव में तो जाति बदल कर ही प्रधानमंत्री आवास का आवंटन कर दिया गया, इसकी जांच चल रही है। यह तो महज उदाहरण भर है जिले भर में पीएम आवास के लाभार्थियों के चयन में धांधली की गई है। अधिकांश गांवों में बिना बैठक कराए है लाभार्थियों का चयन कर लिया गया। आवास योजनाओं की बड़े पैमाने पर धांधली ब्लाक से लेकर जिले तक के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से ही किया जा रहा है। बताया जाता है कि आए दिन अपात्रों को आवास आवंटन करने की शिकायत ग्रामीणों की ओर से आला अफसरों से की गई लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। आलम यह है कि अब ग्राम स्तर से लेकर जिले स्तर तक की गई गड़बड़ी की एक-एक कलई खुलने लगी है।
पीएम आवास आवंटन की पूरी जिम्मेदारी ब्लाक स्तरीय अधिकारियों की तय की गई है। आवंटन में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर जांच करा कर कार्रवाई की जाएगी।
- संतोष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी