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बड़े पैमाने पर हो रहा सफेद बालू का खनन

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बलिया। जिले में खनन माफिया काफी सक्रिय हैं। लाल बालू की तस्करी के साथ ही नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर सफेद बालू का खनन जारी है। कई जगह तो सफेद बालू डम्प कर बिक्री भी की जाती है। जबकि जनपद में सफेद बालू के खनन पूरी तरह रोक है और पट्टा आवंटन की प्रक्रिया चल रही है।
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प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बावजूद न तो लाल बालू की तस्करी पर लगाम लग सकी और न ही अवैध तरीके से हो रहे सफेद बालू पर कोई असर पड़ा। बल्कि दोनों ही कामों में बढ़ोत्तरी जरुर हो गई। आलम यह है कि जनपद के प्रांतीय सीमाओं भरौली व बैरिया के अलावा नदियों के रास्ते जहां लाल बालू की तस्करी चरम पर है वहीं जिले के विभिन्न नदियों के किनारे अवैध तरीके से सफेद बालू का खनन भी बड़े पैमाने पर हो रहा है। बताया जाता है कि खासकर गंगा व घाघरा नदी के किनारे सफेद बालू पाया जाता है। लेकिन पिछले आठ सालों से उच्च न्यायालय की ओर से बालू खदानों के नए पट्टा करने पर रोक लगी हुई है। हालांकि शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने पट्टा आवंटन की कार्रवाई शुरु की है। लेकिन इसके विपरीत माफियाओं की ओर से सालों से अवैध तरीके से सफेद बालू का खनन किया जाता है।
गंगा के किनारे कोटवां नारायनपुर से लेकर बैरिया तक दर्जनों स्थानों पर धड़ल्ले से अवैध तरीके से सफेद बालू का खनन किया जा रहा। इसमें कोटवां नारायनपुर, सरयां, भरौली, सोहांव, पलियाखास, अंजोरपुर के अलावा शहर से सटे विजईपुर व शिवरामपुर घाट तो अवैध खनन के लिए जाने जाते हैं जहां से रोजाना सैकड़ों ट्रालियां सफेद बालू निकाली जाती हैं। शहर के आसपास के घाटों से अवैध खनन कर बालू लदे ट्रैक्टर शहर से ही गुजरते हैं लेकिन इस पर पुलिस, वन विभाग, राजस्व विभाग, खनन विभाग की या तो नजर नहीं पड़ती। इसके अलावा घाघरा के किनारे भी दर्जनों स्थानों पर अवैध खनन का काम धड़ल्ले से हो रहा है। खासकर सीसोटार, लिलकर, डूहा बिहरा, कठौड़ा आदि घाट पर।
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कोट
सफेद बालू खनन पर फिलहाल पूरी तरह रोक है। अवैध खनन करने वालों पर कार्रवाई को संबंधित एसडीएम व थाना को निर्देश दिया गया है। जल्द ही इस बाबत छापेमारी कर कार्रवाई की जाएगी।
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मनोज कुमार सिंघल, अपर जिलाधिकारी
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