सीबीएसई बोर्ड में यह गलती कब से चली आ रही है, यह किसी को पता नहीं है लेकिन कुछ दिन पूर्व यूपी में राष्ट्रगान की तौहीन और फिर संशोधन के बाद भी सीबीएसई को इसे संज्ञान में लेकर अपनी भूल सुधार कर लेनी चाहिए थी लेकिन बोर्ड ने ऐसा नहीं किया। यूपी के घटनाक्रम पर गौर फरमाया जाय तो 2009 में पुस्तकों की समीक्षा के दौरान इस पर चर्चा भी हुई और राज्य शिक्षक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद इस बाबत रिपोर्ट मांगी। उस समय भी सिंधु शब्द की जगह सिंध शब्द होने के प्रमाण दिए गए थे लेकिन संशोधन नहीं हो पाया। इसके बाद केंद्र सरकार के प्रकाशन भारत 2014 का हवाला दिया गया, साथ ही इसमें प्रकाशित सही राष्ट्रगान दिखाया गया। तब जाकर अभी नए पुस्तकों में संशोधन होना शुरू हो गया है और इस वर्ष प्रकाशित पुस्तकों में सही राष्ट्रगान दिखाया गया है। लेकिन सीबीएसई बोर्ड अब भी इन सब चीजों की जानकारी से परे हैं और एसंबली के समय जिस तरह डायरी में राष्ट्रगान अंग्रेजी में लिखा गया है उसी तरह वह उच्चारण करते हैं। दरअसल यहां भी सिंध की जगह सिंधु लिखा गया गया है।