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Ballia News: पुलिस के निशाने पर दलाल, संदिग्धों से की पूछताछ

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बलिया। सामूहिक विवाह योजना में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद दलालों के साथ ही विभागीय कर्मियों में भी बेचैनी है। कार्रवाई के बाद से ही रोजाना विकास भवन में दिखने वाले दलाल गायब हैं। बताया जाता है कि अंडरग्राउंड होकर पुलिस की कार्रवाई पर नजर रख रहे हैं। उधर, पुलिस भी दलालों को चिह्नित करने में जुटी है। बताया जाता है कि पुलिस अलग-अलग इलाकों में संदिग्धों से पूछताछ कर रही है।
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25 जनवरी को मनियर में समाज कल्याण विभाग की ओर से मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह आयोजित हुआ था। इसमें कई कन्याओं की ओर से घूंघट में खुद ही वरमाला डालने का वीडियो वायरल हुआ तो अधिकारियों के कान खड़े हो गए। मामला संज्ञान में आते ही मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज ने ब्लॉकवार 20 टीमों से मामले की जांच कराई जिसमें करीब 240 शादियां फर्जी होने की बात सामने आई। जांच में यह बात भी सामने आई कि योजना में विभागीय कर्मियों व दलालों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा को अंजाम दिया गया। पांच दिन पहले मनियर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया और पुलिस ने जांच शुरू कर दी। इस मामले में समाज कल्याण विभाग के दो एडीओ व एक हॉस्टल अधीक्षक तथा पटल प्रभारी समेत 15 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। लेकिन अभी भी पुलिस की जांच जारी है और पूछताछ में सामने आए नामों के आधार पर पुलिस की दस्तक भी जारी है। बताया जाता है कि इस मामले में पुलिस संदिग्धों से पूछताछ कर ही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि पुलिस के निशाने पर अभी कई ऐसे लोग हैं जो विभागीय कर्मियों व अधिकारियों से मिलीभगत कर सरकारी धन का बंदरबांट कर रहे थे।
कई के गिरेबान तक पहुंच सकती है जांच
सामूहिक विवाह योजना में फर्जीवाड़ा मामले की जांच अभी भी चल रही है। हालांकि मामले में गिरफ्तार समाज कल्याण विभाग के दो सहायक विकास अधिकारी व एक पटल प्रभारी काे निलंबित किया जा चुका है। लेकिन जांच में विभाग के दो अन्य कर्मी भी अफसरों के निशाने पर हैं। इस मामले में पुलिस अभी पूरा साक्ष्य जुटाने का काम रही है।
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सोते रहे अफसर, होता रहा फर्जीवाड़ा
सामूहिक विवाह योजना में अगर जिम्मेदार अधिकारियों ने इसकी ठीक तरीके से मॉनीटरिंग की होती तो शायद इतना बड़ा फर्जीवाड़ा नहीं हो सकता था। नियमानुसार गांव से संबंधित किसी भी तरह की जांच संबंधित सचिव या लेखपाल से कराई जाती है लेकिन यहां सभी जांच अकेले एडीओ समाज कल्याण ने ही कर दी। इतना ही नहीं इन आवेदनों को बीडीओ की लॉगिन से अग्रसारित किया गया है लेकिन किसी भी बीडीओ की नजर इस पर नहीं पड़ी और न ही किसी आवेदन का बीडीओ ने सत्यापन ही उचित समझा। इसी तरह समाज कल्याण विभाग में जब आवेदन पहुंचा तो वहां भी प्रभारी अधिकारी ने इसका सत्यापन पर्यवेक्षक से कराना उचित नहीं समझा। आलम यह रहा कि अफसर सोते रहे और दलाल ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक कर्मियों की सांठगांठ से अपना खेल करते रहे।
सामूहिक विवाह योजना से संबंधित मुकदमे की जांच अभी चल रही है। कई की संलिप्तता सामने आ रही है, साक्ष्य जुटाने के साथ ही पूछताछ भी चल रही है।- मंतोष सिंह, थानाध्यक्ष, मनियर, बलिया।
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