बलिया। विश्व भोजपुरी सम्मेलन जनपदीय इकाई और हिंदी प्रचारिणी सभा की ओर से नगर के टाउन हाल बापू भवन में विभिन्न आलेखों पर आधारित पुस्तक भोजपुरी की संवैधानिक मान्यता, सवाल, विमर्श, समाधान का विमोचन किया गया। इस दौरान जनपद सहित अन्य जनपदों के साहित्यकार मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ साहित्यकार डॉ. अरुणेश नीरन एवं विशिष्ट अतिथि पूर्व मंत्री राजधारी सिंह ने किया। इस दौरान पाती के संपादक और विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष द्वारा प्रो. रामसुंदर को पाली कला सम्मान एवं अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने अजीत दूबे के भाषा संबंधी प्रयासों और निष्ठापूर्वक किए गए मातृभाषा संबंधी प्रयत्नों की सराहना की। कहा कि भोजपुरी आंदोलन की यह उपयोगी और महत्वपूर्ण पुस्तक है। साहित्यकार डॉ. अरुणेश नीरन ने कहा कि अजीत दूबे ने तथ्यों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के साथ भोजपुरी भाषा की संवैधानिक मान्यता के लिए वर्षों से निरंतर प्रयास किया। उनके आलेख समय-समय पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। इस दौरान डॉ. अशोक द्विवेदी ने विमोचित पुस्तक पर कहा कि जनसंख्या के हिसाब से बोली जाने वाली भाषाओं में भोजपुरी का स्थान हिंदी के बाद दूसरा है क्योंकि यह 15 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाती है। कबीर, गोरखनाथ आदि से शुरू होकर वर्तमान तक इसका समृद्ध् वाचिक, लिखित साहित्य है। अजीत दूबे ने कहा कि इसकी संवैधानिक मान्यता को लेकर तथ्यों और तर्कों से समय-समय पर देश के प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में जो लेख लिखे उनको इस पुस्तक में संकलन और संपादन कुशलता से किया गया है। मौके पर विजय मिश्र, केके सिन्हा, शशि प्रेम देव, डॉ. अशोक द्विवेदी, हीरा लाल हीरा, शत्रुघ्न पांडेय, शिवजी पांडेय रसराज, बृजमोहन प्रसाद अनाड़ी, अशोक तिवारी, नवचंद्र तिवारी, कादंबिनी सिंह आदि लोगों ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के प्रति विजय मिश्र ने आभार प्रकट किया।