बलिया। जिला महिला अस्पताल के पैथालॉजी में आटो बायोकेमिस्ट्री एनलाइजर मशीन तीन दिन से खराब है। इसके चलते खून की जांच बंद है। बेहतर इलाज व जांच के लिए दूर दराज से आने वाली गर्भवती महिलाओं को निजी लैबों में महंगे दर पर जांच करानी पड़ रही है। गर्भवती महिलाओं व नवजात बच्चों को ज्यादा दिक्कत हो रही है। उन्हें प्राइवेट पैथालाजी में महंगे दर रक्त की जांच करानी पड़ रही, जिससे उनका जमकर आर्थिक दोहन हो रहा है। जबकि मशीन को बनाने में सिर्फ छह हजार रुपये का खर्च आने की बात विभागीय जानकार कह रहे है।
जानकारों का कहना है कि मशीन का लैंप खराब है। इससे खून की रीडिंग होती है। लखनऊ की साइरेक्स कंपनी मशीन की मरम्मत करती है। अस्पताल प्रशासन द्वारा मशीन खराबी की सूचना कंपनी को देने के बावजूद अब मरम्मत को कोई टेक्नीशियन नहीं आए। लिहाजा, मधुमेह, संक्रमण, किडनी व लीवर, नवजात बच्चे की पीलिया समेत दर्जन भर की जांचें नहीं हो पा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के सीएचसी पीएचसी पर जांच की सुविधा न होने पर बेहतर इलाज की आस में जिला महिला अस्पताल आने वाली महिलाओं को कर्ज लेकर निजी जांच केंद्रों पर खून जांच करानी पड़ रही है। चिकित्सक द्वारा जांच लिखने पर महिलाओं को एक हजार से 1500 रुपये निजी जांच केंद्रों को चुकाने पड़ रहे हैं। महिला अस्पताल में रोजाना चार से पांच सौ मरीजों की ओपीडी है। 40 प्रतिशत लोगों को खून की जांच लिखी जाती है। इस समय प्रेग्नेंसी व ब्लड ग्रुप की मैनुअल जांचें ही हो पा रहीं हैं। एसएनसीयू वार्ड में भर्ती बच्चों की रोज जांच कर उनकी स्थिति देखी जाती है।
पैथालाजी में बायोकेमिस्ट्री एनलाइजर मशीन खराबी से मरीजों की परेशानी बढ़ गई। मरम्मत करने वाली कंपनी को सूचित कर दिया गया है। टेक्नीशियन जल्द आकर मरम्मत करेंगे। - डॉ. सुमिता सिन्हा, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल