भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और बलिया के भाजपा सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने सोमवार को किसान आंदोलन को राजनीतिक करार दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी। इन कानूनों को वापस लेने के लिए नहीं बनाया गया है। संसद में बना कानून अगर सड़क पर आंदोलन करके वापस हो जाएगा तो संसद की प्रतिष्ठा क्या रह जाएगी।
सांसद ने कहा कि किसानों और कृषि के हित में किसी भी तरह के सुझाव का सरकार स्वागत करेगी लेकिन किसानों की आड़ में विपक्ष अपने हित न साधे। किसान आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कई लोग चुनाव लड़ चुके हैं। राकेश टिकैत के साथ कई और ऐसे नेता हैं, जो भविष्य में भी चुनाव लड़ सकते हैं।
आंदोलन के पीछे खड़ी कांग्रेस, सपा, बसपा और रालोद के नेता भी अब सामने आ चुके हैं। यदि उनको आंदोलन चलाना है तो अपनी पार्टी के बैनर तले आंदोलन करें। अपना राजनीतिक दल होने के बावजूद विपक्ष किसानों की आड़ में आंदोलन क्यों कर रहा है। इससे भविष्य में होने वाले किसान आंदोलनों पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इन बातों से वह इस किसान आंदोलन को लेकर बेहद चिंतित हैं।