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बलिया: ग्रामीणों ने अंग्रेजों के स्टीमर पर कर लिया कब्जा

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लालगंज।। बैरिया थाने पर 14 अगस्त 1942 को दिन में हजारो लोगों की उपस्थिति में सेनानियों के द्वारा भारतीय तिरंगा फहराने व तत्कालीन थानाध्यक्ष काजिम हुसैन की अधीनता स्वीकार करने बाद हौसला से बुलन्द लोगों ने रात्रि में फिर बजरंग आश्रम बहुआरा पर बैठक बुलाई। जिसमें भूपनारायण सिंह, सुदर्शन सिंह, रामजन्म पांडेय आदि सेनानियों की अगुवाई में बहुआरा, मुरारपट्टी, गोपालपुर, श्रीपालपुर, सूर्यभानपुर आदि गांवों के युवक शामिल हुए। बैठक में ब्रिटश सरकार के गंगा नदी में चल रहे स्टीमर पर कब्जा करने की बात तय की गई। उस समय पटना से बक्सर के बीच गंगा नदी में स्टीमर चला करता था। जिस पर सामान लादकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता था। साथ ही लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने का भी यह साधन था। जिसका एक स्टेशन बहुआरा के पास भी था। निर्णय के अनुसार 15 अगस्त की सुबह सैकड़ों सेनानी खेतों में आकर छिप गए और वहां से ही स्टीमर आने का इन्तजार करने लगे। जैसे ही स्टीमर स्टेशन पर पहुंचा दो चार लोग पहले वहां पहुंच कर स्टीमर के लंगर को खूंटे में बांध दिया और स्टीमर चला रहे लोगों से बातें करने लगे। इसके बाद खेतो में छिपे लोगों ने स्टीमर पर कब्जा कर लिया और उसे तोड़-फोड़ कर नष्ट कर दिया। इस तरह 15 अगस्त 1942 को बहुआरा घाट पर ब्रिटिश हुकूमत के स्टीमर को अपने अधिकार में कर लिया गया।
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