जिले में 77वां स्वतंत्रता दिवस ''माटी को नमन, वीरों को वंदन'' थीम के साथ धूमधाम से मनाया गया। सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों पर झंडारोहण के बाद विविध कार्यक्रम हुए। शहर के बीच स्थित शहीद चौक पर मुख्य अतिथि परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह ने झंडारोहण किया। उन्होंने सेनानियों के आश्रितों को अंगवस्त्र व मिष्ठान देकर सम्मानित किया। कहा कि अमर सेनानियों का योगदान हमेशा याद रहेगा।
परिवहन मंत्री ने राज्यसभा सांसद नीरज शेखर व अन्य अतिथियों के साथ चौक में शहीदों की स्मृति में बने स्मृति स्तंभ पर पुष्प वर्षा कर अमर सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। परिवहन मंत्री ने कहा कि क्रांतिकारियों की वजह से यह आजादी मिली है।
आजादी मिलने के बाद देश को विकसित एवं सुंदर बनाने को लेकर उन्होंने तमाम सपने देखे थे, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूरा किया जा रहा है। आजादी की लड़ाई में बलिया का अहम योगदान था। इसीलिए बलिया का नाम इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाता है। उस हिसाब से पहले बलिया को सम्मान नहीं मिल पाया था। हमारी सरकार ने मंगल पांडेय के स्मारक स्थल के लिए तीन करोड़ रुपए देने की व्यवस्था की है। इस शहीद चौक को भी बेहतर स्थल बनाने की पहल होगी। इसके लिए जल्द ही डीएम के नेतृत्व में अभियंताओं की टीम स्थलीय निरीक्षण कर प्लानिंग करेंगे। सांसद नीरज शेखर ने भी सेनानियों को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। सेनानी रामविचार पांडेय ने आजादी की लड़ाई की कहानियों का सजीव वर्णन किया। ज़िलाधिकारी रविंद्र कुमार ने आजादी कहा कि उन शहीदों की देन है कि आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं। इसका महत्व तब और बढ़ जाता है, जब इस महापर्व को मनाने का सौभाग्य क्रांतिकारी जनपद बलिया में मिला हो। 77वें स्वतंत्रता दिवस पर पंचप्रण की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में एसपी एस.आनंद, सीडीओ प्रवीण वर्मा, एएसपी दुर्गा शंकर तिवारी, एडीएम डीपी सिंह, चेयरमैन संत कुमार, एसडीएम सदर अखिलेश यादव मौजूद थे।
कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी ने किया झंडारोहण
जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने अपने आवास पर झंडारोहण करने के बाद कलेक्ट्रेट में झंडारोहण किया। उन्होंने कहा कि विगत वर्षों में विकास कार्यों के सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बलिया ब्रिटिश शासन के लिए चुनौती बन गया था। 19 अगस्त को जेल में बंद कैदी जेल से बाहर आए तो ब्रिटिश सरकार ने पूरी ताकत लगाई और उस समय ब्रिटिश पार्लियामेंट में बलिया को दोबारा प्राप्त करने का उल्लेख विंस्टन चर्चिल ने किया था। आजादी की लड़ाई में बलिया के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। एसडीएम शैलेंद्र चौधरी, राजेंद्र प्रसाद मौजूद थे।