सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने कहा कि 1857 में स्वतंत्रता संग्राम के नायक बलिया जिले के मंगल पांडेय थे। तो, 1942 क्रांति के नायक चित्तू पांडेय। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का भी कार्यक्षेत्र बलिया रहा था। उनके एक हाथ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की गीता, तो दूसरे हाथ में पिस्तौल थी। इसी का परिणाम था कि 1942 में ही बलिया को आजादी मिल गई थी। इस प्रकार आजादी की लड़ाई का बलिया महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु रहा है।
राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने खासकर स्कूली बच्चों से आह्वान किया कि हमारे महान सेनानियों की कहानियों को सुनें। अपने इतिहास को जानें और देश के विकास में सकारात्मक योगदान देने की दिशा में कदम बढ़ाने की प्रेरणा मिलेगी। कहा कि क्रांति में अहम योगदान के कारण ही बलिया को बागी कहा गया, जिसे सुनकर हर बलियावासी को गर्व होता है। इस अवसर पर पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी, पूर्व विधायक संजय यादव, राजधारी सिंह, सहकारी बैंक के चेयरमैन विनोदशंकर दूबे सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।