आगरा में तैनात एयरफोर्स (अग्निवीर) के जवान श्रीकांत चौधरी (22) पुत्र मनजी पटेल का पार्थिव शरीर एंबुलेंस से रेवती थाना क्षेत्र के नारायणपुर पचरुखिया गांव में बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे पहुंचा। श्रीकांत भैया अमर रहे...,जब तक सूरज चांद रहेगा श्रीकांत भैया तेरा नाम रहेगा...नारों के साथ गांव के युवा तिरंगे में लिपटे जवान के पार्थिव शरीर के साथ दरवाजे तक पहुंचे।
पिता मनजी पटेल बेसुध होकर एक टक निहार रहे थे। उनके अंतिम दर्शन के लिए जवान के घर पर लोगों की भीड़ जुट गई थी। उनका पार्थिव शरीर घर से गंगा नदी के पचरुखिया घाट के लिए रवाना हुआ तो हजारों की भीड़ साथ हो चली। पचरुखिया गंगा घाट पर बिहटा एयरफोर्स की 45 सदस्यों टीम ने साथी को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी। बड़े भाई सिद्धांत कुमार पटेल ने मुखाग्नि दी।
गार्ड ऑफ ऑनर में शामिल जवानों ने श्रीकांत की मौत पर सिर्फ इतना बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है। अभी इसकी कोर्ट ऑफ इंक्वारी चल रही है। इस मौके पर एयरफोर्स जूनियर वारंट ऑफिसर परमेश्वर कुमार साह, वी सिंह, कुंदन तिवारी, सार्जेंट हृदय कुमार, क्षेत्रीय विधायक जयप्रकाश अंचल, प्रधान मनोज कुमार यादव, पूर्व प्रधान अशोक सिंह मौजूद रहे।
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13 जून को छुट्टी से लौटे थे नौकरी पर
रेवती थाना क्षेत्र के नारायणपुर दीघार निवासी मनजी पटेल के पुत्र श्रीकांत चौधरी दिसंबर 2022 में भर्ती हुए थे। परिजनों ने बताया कि छह माह पहले में पोस्टिंग हुई थी। तीन जून को वे छुट्टी लेकर घर आए थे। 13 जून को पुनः जाकर ड्यूटी ज्वाइन की थी।
परिजनों के अनुसार श्रीकांत चौधरी संतरी की ड्यूटी में लगे हुए थे। मंगलवार की देर रात उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना आगरा में तैनात उनके साथी जवान ने बुधवार की सुबह करीब 5 बजे फोन से परिजनों को दी थी। परिजनों ने जब जानना चाहा कि श्रीकांत की मौत कैसे हुई तो वहां से किसी ने कुछ भी नहीं बताया। परिजनों का कहना था कि ज़ब तक पोस्टमार्टम की रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।
प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहंुचे, लोगों में गुस्सा: प्रशासन के तरफ से कोई जिम्मेदार अधिकारी जवान को अंतिम विदाई देने में नहीं पहुंचा। इसको लेकर भी लोगों में प्रशासन के प्रति खासी नाराजगी दिखी। क्षेत्रीय विधायक जयप्रकाश अंचल ने जवान को कंधा देकर गंगा नदी के पचरुखिया घाट तक पहुंचाया। उन्होंने भी प्रशासन की तरफ से किसी जिम्मेदार अधिकारी को मौके पर न पहुंचने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सरकार अग्निवीर को शहीद का दर्जा नहीं दे रही है, लेकिन ससम्मान अंतिम विदाई तो देनी चाहिए। लोगों में यह भी चर्चा रहा की एयरफोर्स के जवान श्रीकांत का शव आगरा से प्राइवेट एंबुलेंस से पैतृक गांव तक क्यों लाया गया।
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नहीं चला कारणों का पता
22 वर्षीय जवान श्रीकांत कुमार चौधरी का पार्थिव शरीर पचरुखिया घाट पर गंगा की लहरों में विलीन हो गया। उसकी मौत ने कई अनसुलझे प्रश्न खड़े कर दिए। घर से लेकर घाट तक हर किसी में यही चर्चा रही की मौत की वास्तविक वजह क्या है? आगरा से शव के साथ आए हुए साथी जवान और बिहटा एयरफोर्स से आए जवानों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होने का हवाला दिया, लेकिन यह बात किसी के गले में नहीं उतर रही थी। हर कोई यही कह रहा था कि ऐसे कैसे संभव है कि उस यूनिट में तैनात अधिकारियों व जवानों को मौत की असल वजह पता न हो।