बलिया। समाज कल्याण विभाग में लाभार्थियों को योजना का लाभ देने में भी मनमानी की जाती है। बजट का बहाना बनाया जाता है और बजट मिलने पर खास लाभार्थियों का भुगतान किया जाता है। पारिवारिक लाभ योजना के तहत कई लाभार्थी कार्यालय का चक्कर लगा रहे। करीब ढाई वर्ष पहले ग्रामीण बैंकों के विलय व आईएफएससी कोड बदलने के कारण कल्याण सेक्टर के लाभार्थियों को काफी परेशान होना पड़ा। लेकिन विभागीय अधिकारी आज भी इसका निस्तारण नहीं कर पा रहे हैं। जिले में सबसे अधिक ग्रामीण बैंक की 86 शाखाएं हैं जो कमोवेश ग्रामीण इलाके के प्रमुख बाजार व गांवों में स्थापित हैं। ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश लोगों के खाते भी इन्हीं बैंकों में हैं। समाज कल्याण विभाग से संचालित अलग -अलग योजनाओं के कई लाभार्थी बीते दो वर्षों से कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन विभाग की ओर से इसका निस्तारण नहीं किया जा रहा है। विभागीय कर्मी कभी बजट तो कभ अन्य बहाना बनाकर लाभार्थियों को वापस कर दे रहे हैं। करीब दो माह पहले शासन की ओर से पारिवारिक लाभ योजना के तहत छह लाख की धनराशि मुहैया कराई गई लेकिन इसके भुगतान में काफी खेल किया गया और दो वर्ष पूर्व के लाभार्थियों का भुगतान अभी भी अधर में है। हनुमानगंज ब्लॉक के वैना गांव निवासी ममता सिंह का पारिवारिक लाभ योजना के तहत आवेदन स्वीकृत है। लेकिन अब तक उनके खाते में धनराशि नहीं पहुंच सकी। बेलहरी ब्लॉक के पिंडारी गांव निवासी रीना देवी ने पारिवारिक लाभ योजना के तहत दो वर्ष पूर्व आवेदन किया। आवेदन आज भी पेंडिंग है, जबकि इसके बाद के आवेदन करने वालों का भुगतान किया गया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि पूर्व में कई लाभार्थियों की धनराशि बैंकों के आईएफएससी बदलने के कारण पीएफएमएस से वापस हो गई। इन लाभार्थियों के भुगतान के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। अनुमति मिली तो भुगतान किया जाएगा।