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जनेऊ पूजा में श्रद्धालुओं ने किया प्रतिभाग

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बलिया। हमारे शास्त्रों के अनुसार चारों वर्णों के लिए चार महापर्व का वर्णन किया गया है। जिसमें ब्राह्मण के लिए उपाकर्म, क्षत्रिय के लिए विजयदशमी, वैश्य के लिए दीपावली तथा शूद्र के लिए होली की चर्चा है। यह बातें तपोनिष्ठ ब्रह्मचारी कन्हैया महाराज ने श्रीराम जानकी मन्दिर खोरीपाकड़ के प्रांगण मे उपाकर्म (श्रावणी ) के अवसर पर एकत्रित लोगों को संबोधित करते हुए कही। ब्रह्मचारी जी ने बताया कि इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा को चन्द्रग्रहण का योग होने से शास्त्रीय मान्यता के अनुसार विकल्प के रूप मे श्रावण शुक्ल पंचमी को ही उपाकर्म मनाया जा रहा है। आचार्य पं. भूपेन्द्र मिश्र जी ने कहा कि कर्मकांड जीवन मे शुद्धता लाता है। आचार्य पं रमेश पाण्डेय जी ने कहा कि उपाकर्म (श्रावणी ) वेदोक्त कर्मों का नवीनीकरण करता है। गंगा किनारे जाकर वैदिक विधि से स्नान, तर्पण, मध्याह्न संध्या करने के बाद मन्दिर प्रांगण में ऋषि पूजन जनेऊ पूजन आदि के बाद सभी लोग प्रसाद ग्रहण किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ रामसुरेश राय द्वारा किया गया।
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