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Ballia News: नदी में समा गए 45 आशियाने, 60 धराशायी होने के कगार पर

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बैरिया। गोपालनगर टाड़ी बस्ती में सरयू नदी का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को शिवजी यादव, बच्चालाल यादव, काशी यादव और केदार यादव का पूरा मकान नदी की धारा में समा गया। किशुनी यादव सहित कई लोगों के मकान का कुछ हिस्सा नदी की मुख्यधारा में गिर गया। इस वर्ष अब तक 35 परिवारों के पक्के मकान व नौ परिवारों की झोपड़ी युक्त मकान सहित कुल 45 परिवारों का मकान नदी में विलीन हो चुका है। फिलहाल इस बस्ती में 60 परिवारों का मकान सरयू नदी में कभी भी विलीन होने के कगार पर है। कटान पीड़ित कटान स्थल से निकल कर सुरक्षित ठौर ढूंढ रहे हैं।
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गोपालनगर टाड़ी बस्ती 170 परिवारों की थी। इस बस्ती से 500 मीटर की दूरी पर एक निजी कम्पनी के टावर के पास 105 परिवारों का एक और बस्ती है। इस तरह से टाड़ी के दोनों बस्ती को मिलाकर 275 परिवार निवास करते थे। पिछले वर्ष टाड़ी बस्ती के 65 परिवारों का रिहायशी मकान सरयू नदी में विलीन हो गया था। वे लोग रामबालक बाबा आश्रम के पीछे टीएस बंधे पर शरण लिए हुए हैं। बस्ती से 500 मीटर की दूरी पर एक निजी कम्पनी के टावर के पास 105 परिवार निवास करते हैं। इन परिवारों की भी सांस अटकी हुई है। कटान पीड़ितों का कहना है कि जिस तरफ का कटान हो रहा है वह दिन दूर नहीं जब हम लोगों का भी मकान सरयू नदी में विलीन हो जाना है। क्षेत्रीय लेखपाल राजू यादव ने बताया कि इस सप्ताह में सिर्फ शुक्रवार को छोड़कर सरयू नदी की लहरें हर दिन मकानों पर कहर बरपा रही है। शनिवार को दो लोगों का मकान और रविवार को चार लोगों का रिहायशी मकान नदी में समा गया। लेखपाल ने बताया कि कुल 63 लोगों को राशन किट व त्रिपाल वितरण हुआ है। सात लोगों को आवासीय पट्टा दिया गया है। एसडीएम के निर्देश पर अन्य वंचित लोगों को राशन किट व तिरपाल देने के लिए सूची बनाई जा रही है। एक से दो दिनों को अंदर वितरण किया जाएगा। भूमिहीन कटान पीड़ितों के लिए भूमि तलाश की जा रही है। जल्द ही उन्हें भी आवासीय पट्टा दिया जाएगा।




खुले आसमान के नीचे पेट भरने की जुगत
बैरिया। चार रिहायशी मकान रविवार को सरयू में विलीन होने के बाद टाड़ी के कटान पीड़ितों की महिलाएं नदी के किनारे खुले आसमान के नीचे आंखों में आंसू लिए चूल्हे पर खाना पका रही थीं। खाना पका रही चिन्ता देवी पत्नी संजय यादव, रेखा देवी पत्नी उपेन्द्र यादव आदि महिलाओं ने कहा कि सरयू ने हमसे सबकुछ छीन लिया। भूख मिटाने के लिए कुछ न कुछ बनाना पड़ेगा। ऐसे में जब सिर पर छप्पर नहीं है तो हम खुले आसमान के नीचे खाना बनाने को मजबूर हैं।वहीं, भूख से छटपटा रहे छोटे-छोटे बच्चे खुले आसमान के नीचे तख्ते पर बैठकर रोटी खाते नजर आए। इन्हें क्या मालूम कि हमारे परिजन किस परेशानियों से गुजर रहे हैं।
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सरयू के जिन कटान पीड़ितों को राशन किट नहीं मिला है, उनकी सूची तैयार हो रही है। उन्हें भी राशन किट व तिरपाल दिया जाएगा। जरूरतमंद भूमिहीनों को आवासीय पट्टे की भूमि देने के लिए जीएस की भूमि तलाश की जा रही है। - आत्रेय मिश्र, उपजिलाधिकारी, बैरिया
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