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जन जागरुकता से ही नदियों के प्रदूषण पर लगेगी लगाम

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बलिया। नदियों को साफ करने के लिए सरकारी और निजी स्तर पर हुए प्रयासों से पर्यावरण विशेषज्ञ पूरी संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि उनका मानना है कि निजी संस्थाएं तो कुछ कर भी रही हैं लेकिन सरकारी तौर पर तो कोई कवायद भी नहीं की जा रही है। पर्यावरण विशेषज्ञ की मानें तो नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए जन जागरूकता सबसे बड़ा उपाय है। गंगा समेत अन्य नदियों में दिनों-दिन प्रदूषण बढने से लोगों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सरकारों की ओर से दावे तो किए जाते हैं लेकिन धरातल कभी भी कोई कार्य होता नहीं दिखता है। जनपद में गंगा, घाघरा व टोंस नदी की सफाई को लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रयास नहीं किया गया है। हालांकि हाईकोर्ट के निर्देश पर गंगा में मूर्ति विसर्जन पर रोक जरुर लगाई गई है लेकिन वह भी पूरी तरह क्रियान्वयन नहीं हो सका है। नदियों में दिनों-दिन बढ़ते प्रदूषण को लेकर पर्यावरणविदें ने भी चिंता व्यक्त की है। प्राचार्य व पर्यावरणविद् डा. गणेश पाठक की मानें तो नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए ठोस उपाय नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में आम जनजीवन पर काफी असर पड़ेगा। बताया कि नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए समय-समय पर सरकारों की ओर से दावे तो किए गए लेकिन धरातल पर इसका कोई असर नहीं दिखा और स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है। बताया कि निजी संस्थाएं अपनी क्षमता के अनुसार नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कुछ न कुछ तो कर रही हैं लेकिन सरकारी तौर पर कवायद नहीं होना चिंताजनक है। बताया कि नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सबसे पहले उनकी मूल धारा से छेड़छाड़ करना बंद करना होगा। इसके अलावा नदियों में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर आमलोगों को जागरुक होना होगा।
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