बलिया। जिले के सरकारी अस्पतालों में शासन ने दो साल पहले 40 चिकित्सकों की तैनाती की थी। इनमें से 30 डॉक्टर कार्यभार संभालने के बाद से ड्यूटी पर नहीं आए हैं।
कोरोना काल के बाद जिले के अलग-अलग चार सरकारी अस्पतालों में तैनात छह डॉक्टरों ने नौकरी छोड़कर निजी नर्सिंग होम खोल लिया। इससे सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के पद खाली हो गए हैं। बीते वर्षों में जिला अस्पताल की एक महिला फिजीशियन, एक रेडियोलाजिस्ट, जिला महिला अस्पताल की एक महिला चिकित्सक, एक बालरोग विशेषज्ञ, एक ऑर्थो सर्जन, दो ईएनटी सर्जन सहित छह डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ दी है।
जिला महिला और जिला अस्पताल समेत 20 सीएचसी, 12 पीएचसी और 66 न्यू पीएचसी संचालित हैं, जहां 205 चिकित्सकों के पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष अस्पतालों में 95 डाॅक्टर तैनात हैं। जिले में 19 के सापेक्ष सिर्फ छह महिला रोग विशेषज्ञ ही तैनात हैं। चिकित्सकाें की कमी के कारण सरकारी अस्पतालों में मरीजों को चिकित्सकीय सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। अस्पतालों में विशेषज्ञ डाॅक्टर के न होने से मरीज रेफर किए जा रहे हैं।
इस संबंध में सीएमओ डाॅ. विजय पति द्विवेदी का कहना है कि प्रदेश में चिकित्सकों की भारी कमी है। वाकिंग इंटरव्यू से डॉक्टरों की कमी को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों पर सुविधाओं को बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानांतरण होने के बाद से नदारद चिकित्सकों की सूची तैयार की जा रही है।
।