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सब कुछ देने की शक्ति केवर सद्गुरु में होती है

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रसड़ा। गुरु का कार्य अपने शिष्य के अंदर के अहंकार को तिरस्कृत एवं परिष्कृत करते हुए जीवात्मा और परमात्मा से संबंध स्थापित करा दे और जो स्थापित है उसे ज्ञापित करा दे उसका नाम सद्गुरु है। गुरु बहुत कुछ दे सकता है, पर सब कुछ देने की शक्ति तो मात्र सद्गुरु में ही होती है। उक्त उद्गार फिरोजपुर स्थित हनुमानजी के मंदिर पर आयोजित श्री हनुमत यज्ञ सह मां काली प्राण प्रतिष्ठा में कथा के दौरान शिवराम दास जी महाराज उर्फ फलाहारी बाबा ने कही। कहा कि प्रथम गुरु तो मां होती है, यदि मां शिक्षित और संस्कारी है तो उसका पुत्र भी शिक्षा और संस्कारपूर्ण होगा। ईश्वर से भी बड़ा गुरु होता है, गुरु को भी अपनी गरिमा का ध्यान रखते हुए समाज के सामने आचार, विचार और व्यवहार करना चाहिए। जीवन में यदि सही सद्गुरु मिल गया तो जीते जी हम पूर्णता का अनुभव अनुभूति और आभास कर लेते हैं। ज्ञान न दिया जाता है न लिया जाता है, गीता के अनुसार तो अज्ञान रूपी आवरण से ज्ञान ढका हुआ है, केवल प्रकट कर दिया जाता है। अज्ञान रूपी चादर हटते ही ज्ञान रूपी मणि स्वयं प्रकाशित होती है और प्रकाश देने लग जाती है।
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