बलिया। पूर्वोत्तर रेलवे श्रमिक संघ के जिला इकाई का वार्षिक सम्मेलन रविवार को रेलवे परिसर में आयोजित की गई। आम सभा को संबोधित करते हुए संघ के महामंत्री विशेश्वर राय ने कहा कि श्रमिक विरोधी भारत सरकार पूंजीपतियों के दबाव में भारतीय रेलवे में ठेकेदारी प्रथा व एफडीआई लागू कर रेलवे को परावलंबी बनाना चाहती है। इस बजट में सरकारी उद्योगों के विकास आदि के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। कहा कि वेतनभोगी व मध्यम वर्ग को कमजोर कर भारतीय रेलवे एवं उद्योगों को कमजोर करने का विरोध किया जाएगा। अरविंद कुमार ने कहा कि संरक्षा से जुड़े पदों ट्रैक मैन, गेट मैन, स्टेशन मास्टर, सिग्नल कर्मचारियों, कांटा वालों को दो-दो महीने तक विश्राम न मिलना, ग्रिवासों का समय से निदान न होना और उनके उत्पीड़न पर प्रशासन की चुप्पी का विरोध किया जाएगा। कहा कि आंदोलन के प्रथम चरण में 16 फरवरी को मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय गेट पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। कर्मचारियों के कार्यस्थलों पर सुविधाओं का अभाव है और रेलवे स्टेशनों व समपारों पर भी पेयजल, शौचालय आदि की सुविधाएं नहीं हैं। गाड़ियों की संख्या बढ़ती गई लेकिन कर्मचारियों की संख्या दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है जिसका प्रभाव कर्मचारियों के स्वास्थ्य के साथ ही संरक्षा पर भी पड़ रहा है। मनोज तिवारी ने कहा कि रेलवे बोर्ड की ओर से कर्मचारियों के लिए चार्टर तो जारी किया गया लेकिन उसका अनुपालन मंडल प्रशासन की ओर से नहीं कराया जा रहा है। इस मौके पर जेएन पाठक, अनिल तिवारी, मुरलीधर चौरसिया, राकेश कुमार गिरि, पीके सिंह, मिश्री लाल, परमानंद गिरि, हमीदुल्ला, आरके पांडेय, विद्यासागर, विमला ठाकुर, प्रेमा यादव, सुशील त्रिपाठी, रंजन तिवारी आदि थे।