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मतदाताओं की खामोशी से उम्मीदवारों की बढ़ी बेचैनी

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बेल्थरारोड। निकाय चुनाव का प्रचार परवान चढ़ने लगा है। चुनाव प्रचार धीरे-धीरे शबाब पर पहुंच गया है। जुलूस ,नारेबाजी और सभाओं का दौर जारी है। चुनाव में आरोप-प्रत्यारोप ,गुटबाजी के साथ एक दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ मची है। जनता से सरोकार रखने वाले वास्तविक मुद्दे पीछे छूट गए हैं। सभाओं में विकास की बातें कम और एक दूसरे पर छींटाकशी का दौर शुरू हो गया है। अधिकांश प्रत्याशी स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत कार्य कर रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग बेपरवाह बना हुआ है। चुनावी सभाओं की अनुमति देने के बाद प्रशासन द्वारा सभाओं में वक्ताओं के एक दूसरे के ऊपर की जा रही अभद्र टिप्पणी को नजर अंदाज किया जा रहा है। स्थिति दिनों-दिन विकट रुप अख्तियार करने लगी है। चुनाव प्रचार में सोशल मीडिया का जमकर प्रयोग किया जा रहा है। फेसबुक, वाट्सअप के माध्यम से प्रत्याशियों पर कमेंट किए जा रहे हैं। नगर में साफ-सफाई, प्रकाश, पेयजल, जल निकास, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य बुनियादी सुविधाओं की चर्चा की बातें गौण हो गई। ऐसे में प्रत्याशियों के कार्य आचरण और व्यवहार को लेकर जनता में मंथन का दौर जारी है। वहीं मतदाताओं की खामोशी से उम्मीदवारों तथा उनके समर्थकों को बेचैनी दिनों दिन बढ़ती जा रही है। शहरी चुनाव होने के चलते मतदाता अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं। यह बात दिगर है कि जनसंपर्क के दौरान मतदाता अपने यहां आने वाले हर प्रत्याशी को वोट के लिए आश्वस्त कर रहे है, लेकिन चुनाव के वक्त मतदाता कौन सा गुल खिलाएंगे यह समझ पाना मुश्किल है। फिर भी चुनाव परिणाम चमत्कारी होंगे, जो राजनैतिक पंडितों को हैरान कर देंगे।
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