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प्रति मवेशी देना पड़ रहा 250 रुपये किराया

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नरही क्षेत्र के शाहपुर बभनौली गांव में उमरपुर दियारे से नाव के सहारे मवेशियों को लाते पशुपालक। स? - फोटो : BALLIA
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नरहीं। गंगा का जलस्तर जैसे-जैसे बढ़ रहा है। किसानों एवं बाढ़ पीड़ितों की धड़कनें तेज होती जा रही हैं। गड़हांचल में गंगा, टोंस और मगई नदी एक साथ तबाही मचाती है। अब बाढ़ का पानी खेतों और रिहायशी इलाकों में घुसने लगा है। केंद्रीय जल आयोग बक्सर के अनुसार, रविवार को गंगा के जलस्तर में दो घंटे में एक सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। गंगा खतरा बिंदु 60.320 को पारकर 60.440 मीटर पर पहुंच गई है। शाहपुर बभनौली गांव निवासी सुदामा यादव ने बताया कि उनकी झोपड़ी पानी में डूब गई है। सामान के साथ दियारे में फंसे मवेशियों को लाने की चिंता सता रही है। अभी तक नाव का इंतजाम नहीं किया गया है। मोतीलाल साहनी ने बताया कि 26 सौ रुपए से हरे मिर्च की खेती के लिए बीज तैयारकर खेत में रोपाई कर दी थी। बाढ़ का पानी खेत में घुस गया। मिर्च के पौधों को उखाड़ कर फिर सुरक्षित स्थान पर लगा रहा हूं। धनजी साहनी ने बताया कि दियारे से मवेशियों को लाने के भाड़े पर इंजन वाली नाव मंगाया गया है। प्रति मवेशी लाने के लिए 250 रुपया देना पड़ रहा है। दियारे में अभी भी 80 फीसदी मवेशी फंसे हुए हैं। गंगहरा के किसान पारस यादव ने बताया कि गंगा का जलस्तर थोड़ा भी बढ़ा तो मेरे गांव के किसानों की 50 लाख की सब्जी की खेती बर्बाद हो जाएगी। इच्छा चौबे का पूरा गांव के लोगों ने अपना आशियाना बैरिया-थम्हनपुरा मार्ग पर बनाना शुरू कर दिया है। बैरिया गांव में लगे टावर में पानी घुस गया है।
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