सुखपुरा। इस संसार में कर्म की प्रधानता है, जो जैसा कर्म करता है उसे उसका फल स्वयं भुगतना पड़ता है। स्वयं भगवान भी अपने को कर्म फल से दूर नही रख पाए। जब भगवान राम ने छिप कर महावली बालि का वध किया तो उसका फल उन्हें कृष्ण जन्म में भोगना पड़ा। उक्त बातें बयास पीठ से साध्वी साधना जी ने कहीं। वह मां भगवती मंदिर में स्थित हनुमान मंदिर के सम्मुख शुक्रवार की रात भक्तों को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि भगवान राम को कृष्णावतार में बाली को छल से मारने का खामियाजा उस समय भोगना पड़ा, जब बहेलिया ने उन्हें वाण से मारा। इसलिए हमे भगवान के कर्म व्यवस्था को मानना चाहिए। अपने प्रयासों और आचरण को सही दिशा में चलाकर जीवन की सार्थकता तथा भगवान का प्रेम प्राप्त कर संपूर्ण मानव को दीन दुखियों की सेवा का संकल्प लेने की जरूरत है। दीन दुखियों की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। साध्वी के शिव विवाह की संगीतमय प्रस्तुति से पूरा पंडाल पूर्णतया भक्तिरस में डूब गया। मुख्य यजमान वीरेंद्र सिंह, पुजारी दयालु दास, जनार्दन सिंह, देवमुनि, प्रभुनाथ सिंह आदि मौजूद रहे।