बहराइच। रूपईडीहा के लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए इंडो- नेपाल बॉर्डर के रूपईडीहा गांव में लगभग सात करोड़ रुपये की लागत से पानी की टंकी का निर्माण कराया गया। इस परियोजना के माध्यम से कस्बे में घर-घर तक पानी पहुंचाना था। टोटी से पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन भी बिछाई गई। लेकिन इस परियोजना का आज तक ट्रायल नहीं किया गया। अब पाइप लाइन जर्जर हो गई है। जिम्मेदारों ने धन खपाने के बाद परियोजना की तरफ पलट कर नहीं देखा। गांव के लोग अभी भी शुद्ध पेयजल की आस लगाए बैठे हैं।
बीते वर्ष 2017 में परियोजना के लिए धन जारी होने के बाद कार्यदायी संस्था जल निगम ने तेजी के साथ कार्य शुरू कराया। टंकी का निर्माण हुआ, पाइपलाइन आधी- अधूरी बिछाई गई। वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कार्यदायी संस्था पर काम पूरा करने का दबाव नहीं बनाया। भाजपा जिला कार्यसमिति सदस्य रतन अग्रवाल, आरके सिंह, डॉ सनत कुमार शर्मा, अनिल अग्रवाल आदि का कहना है कि शुद्ध पेयजल पहुंचाने की मंशा पर जिम्मेदार लोग पलीता लगा रहे हैं।
इस संबंध में लगातार उच्च अधिकारियों को समय-समय पर पत्र के माध्यम से अवगत भी कराया जा रहा है । लेकिन अभी तक पानी सप्लाई का काम नहीं चालू किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि रुपईडीहा कस्बे में इस समय एक भी हैंडपंप नही है जो लगे भी थे उनका वजूद ही समाप्त हो गया। इस अंतरराष्ट्रीय कस्बे में लगातार विदेशियों का आना-जाना रहता है। पानी की टंकी स्थापित कर दी गई लेकिन क्षेत्र के निवासियों को अभी तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया गया है।
नगर पंचायत रुपईडीहा में गोकुलपुर वार्ड में भी जल निगम द्वारा टंकी का निर्माण किया गया था। वहां पर गांव में बड़े-बड़े पाइप बाहर पड़े हुए देखे जा सकते हैं। वहां भी आधा अधूरा ही काम हो पाया है। सरकार द्वारा इस परियोजना के तहत बनाए गए स्वच्छ जल मिशन के तहत योजनाएं धरातल पर सफल होती नजर नहीं आ रही हैं।
जमीन मिलने पर होगी बोरिंग
पांच बड़े नलकूप रुपईडीहा कस्बे में में लगाए जाने थे जिसमें जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण अब तक सिर्फ चार बोरिंग हो पाए है। जमीन मिल जाने पर शेष बोरिंग हो सकेगी। इसके बाद ही पानी की सप्लाई की जा सकेगी।
- संदीप जायसवाल, जेई जल निगम