रुपईडीहा(बहराइच)। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रुपईडीहा के लगभग 25 हजार लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया करवाने के लिए 2017 में पानी की टंकी का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन अब तक लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि जिम्मेदार अधिकारी पांच सालों में पांच में से दो पंपों की स्थापना के लिए जमीन की तलाश नहीं कर पाए हैं। सात करोड़ से पानी की टंकी का निर्माण शुरू हुआ था। जल निगम के जिम्मेदारों ने शुरू में काफी तेजी दिखायी। पाइप डाल दी गई। टंकी का निर्माण भी पूर्ण कर लिया गया और जगह-जगह टोंटियां भी लगा दी गईं। इसके बाद सुस्ती का दौर शुरू हो गया। आलम यह है कि अभी ट्रायल भी नहीं हुआ है और पाइप लाइन की हालत खस्ताहाल हो गई है।
कई बार लिख चुके पत्र
क्षेत्रीय बीजेपी कार्यकर्ता रतन अग्रवाल, डॉ. उमाशंकर वैश्य, भीमसेन मिश्र, आरके सिंह आदि ने बताया कि लगभग 25 हजार की आबादी की इस समस्या के निस्तारण के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। लोगों ने बताया कि आने वाली गर्मी को देखते हुए एक बार फिर से शासन व प्रशासन के जिम्मेदारों को पत्र लिखा जाएगा।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कस्बा क्षेत्र में एक भी हैंडपंप नहीं है। वहीं जो हैंडपंप थे, उनका भी वजूद खत्म हो गया है। लोग किसी तरह निजी हैंडपंप व बोरिंग से काम चला रहे हैं। सीमा पर स्थित होने के चलते यहां अक्सर विदेशी सैलानी भी आते हैं। उन्हें पानी के पाउच और बोतल खरीदनी पड़ रही है।
टंकी संचालन के लिए पांच पंप लगाने हैं। तीन पंपों के लिए स्थान मिल गया है। दो के लिए जमीन नहीं मिल पा रही है। जल्द ही एक पंप स्थापित कर आपूर्ति शुुरू करवा दी जाएगी।
- संदीप जायसवाल, अवर अभियंता, जल निगम