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लेखपालों से लेता था फीडबैक, तब मिली सफलता : डीएम

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बहराइच के जिलाधिकारी डा. दिनेश चंद्र। - फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। जिले में 35575 वरासतें निर्विवाद रूप से कराने वाले बहराइच के जिलाधिकारी इस समय प्रदेश भर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। प्रदेश के मुख्य सचिव ने इस संबंध में हुई एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान प्रदेश के समस्त मंडलायुक्तों के समक्ष जिलाधिकारी की तारीफ की और बहराइच को नजीर के रूप में अमल में लाने को कहा। जिलाधिकारी से जब इस सफलता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जिले के एडीएम से लेकर गांव के लेखपाल तक एक श्रंखला बनाई थी। इसके अलावा वह प्रतिदिन लेखपालों को व्यक्तिगत रूप से फोन करते थे और अद्यतन स्थिति से स्वयं अवगत होकर दिशा-निर्देश देते थे। जिले के उच्चाधिकारियों को भी पता था कि मैं स्वयं स्थिति से अवगत हो रहा हूं। प्रत्येक दिन एक बार वह वरासत की स्थितियों को लेकर जरूर बैठक करते थे। बस इसी वजह से ग्रामसभा स्तर पर ही तेजी आ गई और अभियान सफल हो गया। उन्होंने कहा कि कई प्रकरण ऐसे आए कि मुझे शासन के अधिकारियों से भी सलाह लेनी पड़ती थी।
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जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने बताया कि जब उन्होंने बहराइच में ज्वाइन किया उस समय पहले से 15,698 प्रकरण विचाराधीन थे। क्योंकि यह योजना 29 अक्तूबर 2018 से ही शुरू हो गई थी। पांच जुलाई 2021 को जब वरासत का आंकड़ा मंगाया तो 15,698 प्रकरण विचाराधीन थे। इस संबंध में सभी तहसील स्तरीय अधिकारियों की बैठक बुलाई और इसे एक अभियान के रूप में चलाकर समस्त विचाराधीन प्रकरणों को खत्म करने का निर्देश दिया गया। हालात यह हुई कि 32 महीने की अवधि में 15,698 मामले विचाराधीन थे और मात्र 13 महीने की अवधि में 35,575 प्रकरण हम लोगों ने मिलकर निस्तारित कर लिए। कहने का तात्पर्य यह है कि 13 महीनों में 19877 प्रकरण मेरे समय में भी आए। दोनों को मिलाकर 35,575 प्रकरणों को निस्तारित कर दिया गया। 318 प्रकरण डिफाल्टर पाए गए थे, आज उनकी की भी स्थिति शून्य है।
उन्होंने बताया कि लेखपालों के साथ नियमित बैठक की गई। आगे कोई विवाद न हो इसके लिए खतौनियों को नियमित रूप से पढ़ाया गया। प्रत्येक दिन अनुश्रवण करता था। आंकड़ों में पेंडेंसी को देखते हुए सीधे लेखपाल को फोन मिला देता था। किस गांव में कितने प्रकरण विचाराधीन है वह भी अंगुलियों में रटा हुआ था। कभी- कभी, एक-एक को तीन-तीन बार फोन करना पड़ता था। इससे उसको भी अंदाजा हो जाता था कि इस प्रकरण को लेकर प्रशासन कितना मुस्तैद है। आवेदनों का चिन्हीकरण, पोर्टल पर अपलोड होने की स्थिति पर विशेष ध्यान देने से जिला अव्वल हो गया। खास बात यह है कि जो प्रक्रिया अपनाई गई उसमें एक भी विवाद सुनने को नहीं मिला। वरासत करते समय सबको सुनने का अवसर दिया गया था। इसके लिए भी एक निर्धारित प्रारूप तैयार किया गया था।
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