बहराइच/नानपारा। कोतवाली नानपारा में बृहस्पतिवार को हुए विवेक हत्याकांड का रविवार को पुलिस ने खुलासा कर दिया। विवेक की हत्या अंधविश्वास में फंस कर उसके ही चचेरे भाई ने फावड़े से रेत कर निर्ममतापूर्वक की थी। वहीं इस हत्याकांड में उसके चाचा ने सहयोग किया था। पुलिस ने हत्या में शामिल चाचा-भतीजे व तांत्रिक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं हत्या में प्रयुक्त फावड़े को भी बरामद किया गया है।कोतवाली नानपारा के परसा अगैया निवासी विवेक वर्मा(10) की बीते बृहस्पतिवार को धारदार हथियार से गला रेत कर हत्या कर दी गयी थी। हत्या के बाद गांव में सनसनी फैल गयी थी। रविवार को पुलिस लाइन सभागार में घटना का खुलासा करते हुए एसपी प्रशांत वर्मा ने बताया कि विवेक की हत्या अंधविश्वास में आकर उसके चचेरे भाई अनूप वर्मा ने की थी। इस कृत्य में अनूप के चाचा चिंताराम व तांत्रिक जंगली ने सहयोग किया था। एसपी ने बताया कि हत्यारोपी अनूप वारदात वाले दिन विवेक को अपने साथ खेत ले गया था। जहां उसने फावड़े से गला रेत कर उसकी हत्या कर दी। उसके बाद वह घर चला आया था। उन्होंने बताया कि तीनों आरोपियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया है। त्वरित गिरफ्तारी के लिए खुलासा टीम को 10 हजार रुपए का ईनाम दिया जाएगा। खुलासा टीम में कोतवाल हेमंत गौड़, उपनिरीक्षक विनोद सिंह, धत्रीशंकर सहाय, मुख्य आरक्षी विकास उपाध्याय, आरक्षी ऋषि कुमार, रवि कुमार यादव शामिल रहे।
बहराइच। नानपारा कोतवाली क्षेत्र के परसा अगैया में जितनी सनसनी विवेक हत्याकांड के बाद नहीं हुई थी, उससे ज्यादा पुलिस द्वारा किए गए खुलासे के बाद हुई। रिश्तों को तार-तार करते हुए अंधविश्वास में फंस कर किए गए इस हत्याकांड के आरोपियों के नाम जानने के बाद हर कोई सन्न है। 10 वर्षीय मासूम विवेक वर्मा के हत्याकांड की पटकथा काफी दिन पहले ही लिखने का प्रयास किया गया था, लेकिन तांत्रिक के मना करने पर आरोपी अंजाम नहीं दे सके थे। बताते चलें कि आरोपी अनूप वर्मा विवेक का चचेरा भाई है। अनूप का एक ढाई साल का लड़का सत्यम है, जो अक्सर बीमार रहता है। उसको मानसिक व शारीरिक बीमारियां है। जिसको लेकर अनूप अंधविश्वास में पड़ गया और झाड़फूंक करवाने लगा। इसमें अनूप का चाचा चिंताराम भी उसका सहयोग करता था। दोनों कुछ दिन पूर्व सत्य की झाड़फूंक करवाने के लिए तांत्रित गौतम के पास गये थे। जहां पहली बार शातिर चिंताराम ने नरबली देने की बात कही थी, लेकिन तांत्रिक गौतम ने हाथ खड़े कर दिए थे। तब वह अनूप के साथ एक दूसरे तांत्रिक के पास पहुंचा वहां भी चिंताराम ने नर बलि की पेशकश की। लेकिन दूसरे तांत्रिक ने भी मना कर दिया। दो तांत्रिकों के मना करने पर अनूप व चिंताराम तीसरे तांत्रिक जंगली के पास पहुंचे। यहां भी सत्यम के इलाज के लिए नर बलि की पेशकश रखी गयी। जहां जंगली राजी हो गया और उसने बलि देने के नवरात्र को उचित समय बताया। साथ ही उसने बलि देने की पूरी विधि बताते हुए पूरी योजना बनायी।
वारदात वाले दिन अनूप अपने चचेरे भाई विवेक को खेत की मेढ़ सही करने की बात कह कर अपने साथ ले गया। भाई के साथ जाने के लिए बिना संकोच विवेक भी तैयार हो गया। जहां अनूप ने पूर्व नियोजित साजिश के तहत पहले फावड़े से उसका गला रेत दिया। इसके बाद वह समय माता मंदिर गया और तांत्रिक द्वारा बतायी गयी विधिनुसार पूजा-पाठ की। यही नहीं चेहरे पर बिना शिकन के वह घर पहुंचा और हाथ पैर धोकर अपनी आटा चक्की पर बैठ गया। विवेक हत्याकांड के दौरान तार-तार हुए रिश्तों को लेकर ग्रामीण सकते में हैं।