बहराइच। महाराजा सुहेलदेव स्वायत्तशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में व्यवस्था पटरी पर आने लगी हैं। शहर में लंबे समय से शोपीस बने ट्रॉमा सेंटर का संचालन जल्द शुरू होने जा रहा है। इसको मेडिकल कॉलेज अपनी देखरेख में लेने जा रहा है। इसके लिए प्राचार्य ने जरूरी औपचारिकता पूरी करने के लिए डीएम को पत्र भी लिखा है। इससे 40 बेड का नया अस्पताल मिलने से मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। इसके साथ ही इस बार एमबीबीएस मेें 50 सीटे बढ़ने से छात्रों को भी फायदा हो सकेगा। पड़ोसी देश नेपाल से लेकर आसपास के जिले से आने वाले मरीजों का इलाज अभी तक सिर्फ मेडिकल कॉलेज में ही होता है। लेकिन अब जल्द ही मरीजों के लिए ट्रॉमा सेंटर भी शुरू किया जाएगा। बता दें कि शहर के बीचो-बीच 24 सितंबर 2016 को ट्रामा सेंटर की आधारशिला रखी गई थी। काफी जद्दोजहद के बाद 2.61 करोड़ रुपये खर्च कर ट्रामा सेंटर तैयार हो गया। लेकिन अभी तक यह ट्रामा सेंटर अपने वास्तविक उद्देश्य से काफी दूर है।बताया जाता है कि ट्रॉमा सेंटर में इमरजेंसी से लेकर 40 बेड है। यहां किसी भी हादसे से लेकर अन्य विषम परिस्थिति में मरीजों को भर्ती कर उनका उपचार किया जा सकेगा। लेकिन यहां पर चिकित्सीय कर्मचारियों की भी तैनाती भी सही तरीके से होगी तभी इसका पूरा लाभ मरीजों को मिल सकेगा।
टॉमा सेंटर में इन पदों की दरकार
-02 जनरल सर्जन
-02 आर्थोपैडिक सर्जन
-02 नेत्र सर्जन
06- इएमओ
-06 ओटी टेक्नीशियन
-15 स्टाफ नर्स
-05 एक्स-रे टैक्नीशियन
-05 लैब टैक्नीशियन
-09 नर्सिंग अस्सिटेंट
-09 मल्टी टॉस्क वर्कर्स -
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प्रदेश सरकार द्वारा मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इससे यहां भी करीब 50 सीटे बढ़ने की उम्मीद है। अभी तक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100, नर्सिग की 60 व अन्य कोर्स की सीटे हैं। यहां पढ़ने वाले छात्रों के रहने के लिए हॉस्टल का इंतजाम है। लेकिन अब 50 सीटें बढ़ने के साथ मेडिकल कॉलेज में नया हॉस्टल बनाने के साथ अन्य संसाधन भी बढ़ाए जाएंगे। इसके लिए प्राचार्य डॉ संजय खत्री के स्तर से तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
शहर में स्थित ट्रॉमा सेंटर को हॉयर कर उसका जल्द ही संचालन शुरू कराया जाएगा। ट्रॉमा सेंटर में जरूरत के अनुसार चिकित्सीय टीम व संसाधनों का इंतजाम कराया जाएगा। इसके साथ ही एमबीबीएस में करीब 50 सीटें बढ़ने जा रही है। मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके इसके लिए लगातार प्रयास किया जाता है।
डॉ संजय खत्री, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, बहराइच