बहराइच। जिले के विभिन्न क्षेत्राें में दुर्घटनाओं के शिकार और अन्य गंभीर मरीजों का इलाज करने के लिए शहर के मलेरिया अस्पताल में छह साल पहले ट्राॅमा सेंटर बनाया गया था। 2.61 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2018 में भवन बनकर तैयार हुआ था, लेकिन अभी तक इसका संचालन नहीं हो सका है। यही नहीं अब तक चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती भी नहीं हो सकी है। करोड़ों रुपए की लगत से तैयार हुआ भवन देख-रेख न होने के कारण झाड़-झंखाड़ में तब्दील होकर जर्जर होने लगा है।
शहर के चांदपुरा चौराहा के निकट पुराना मलेरिया अस्पताल में वर्ष 2016 में ट्राॅमा सेंटर बनाने के लिए शासन से मंजूरी मिली थी। 40 बेड वाले ट्राॅमा सेंटर का निर्माण कार्य दो साल में वर्ष 2018 में पूरा हो गया था। इसके बाद वर्ष 2020 में भवन स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित किया गया। ट्रामा सेंटर में 61 डॉक्टर व कर्मियों की तैनाती होनी थी। लेकिन अब तक न तो डॉक्टर व कर्मियों की तैनाती हुई है और न ही संसाधन उपलब्ध कराए जा सके हैं।
लखनऊ रेफर हो रहे गंभीर रूप से घायल मरीज
जिले में प्रतिदिन दर्जनों की संख्या में सड़क हादसे होते हैं। इनमें कई गंभीर रूप से घायल मरीजों को मेडिकल कॉलेज में इलाज नहीं मिल पाता है। इससे उन्हें प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टर लखनऊ रेफर कर देते हैं। ऐसे में बहराइच से लखनऊ तक लगभग 128 किमी लंबी दूरी तय करने में काफी समय लग जाता है, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है।
कोरोना काल में बना था क्वारंटाइन वार्ड
40 लाख की आबादी वाले जिले में कोविड काल के दौरान जिले के लगभग 10 हजार लोग कोरोना संक्रमित हुए थे। दो वर्षों में 178 लोगों की मौत हो गई थी। इस दौरान ट्राॅमा सेंटर में कोरोना मरीजों को भर्ती करने के लिए यहां क्वारंटाइन वार्ड बनाया गया था। कारोना काल खत्म होने के बाद इसे बंद कर दिया। इसके बाद यहां कोई झांकने तक नहीं गया।
इन पदों पर होनी थी तैनाती
जनरल सर्जन- 02
लैब टेक्नीशियन- 05
मल्टी टास्क वर्कर- 09
नर्सिंग असिस्टेंट- 09
एक्सरे टेक्नीशियन- 05
ओटी टेक्नीशियन- 06
आपातकालीन चिकित्सक- 06
नेत्र सर्जन- 02
आर्थोपेडिक सर्जन- 02
स्टाफ नर्स- 15
चल रही कवायद
बहराइच में बने ट्रॉमा सेंटर चालू करने के लिए कवायद चल रही है। जल्द ही इसका संचालन शुरू कर दिया जाएगा। -डॉ. जयंत कुमार, अपर निदेशक स्वास्थ्य