नानपारा (बहराइच)। हेलो! बारावफात जुलूस के दौरान गांव में हादसा हो गया है। हादसे में आपके बेटे की मौत हो गई है। कुछ इसी तरह सुबह तड़के हादसे में मृत तीन बच्चों के पिता को ग्रामीणों ने फोन कर यह सूचना दी। जिसके बाद मृतकों के पिता जो जहां थे, वहीं स्तब्ध हो गए। लोगों ने बताया कि कुछ देर के लिए उनके मुंह से कोई आवाज नहीं निकली और फिर वे फफक-फफक कर रोने लगे। बताते चलें कि हादसे में मृत अरफात (10) के पिता इबारक मुंबई में मेहनत मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। हादसे के वक्त वह मुंबई में ही थे और उन्हें फोन पर इकलौते बेटे की मौत की सूचना दी गई। वहीं मृतक सुफियान (12) के पिता भी मुंबई में काम करते हैं और हादसे के वक्त वह भी वहीं थे। वहीं हादसे में मृत तबरेज (17) के पिता इस्माइल सऊदी में थे। उन्हें भी परिजनों ने फोन से बेटे के मौत की सूचना दी।
घर का चिराग था अरफात
हादसे में मृत अरफात (10) अपने घर का चिराग था। उससे छोटी उसकी बहन सालिया (8) है। वहीं हादसे के वक्त पिता के मौजूद न होने से मां मैैैसरजहां का रो-रो कर बुरा हाल है। वह अपने इकलौते बेटे की मौत के गम में दहाड़ें मार कर रो रही है। पास बैठी महिलाएं उसे बार-बार ढाढ़स बंधवाने का प्रयास करती रहीं, लेकिन मैसर की आंखों से निकल रही आंसुओं की कतार नहीं थमी।
नानी के घर खुशियां मनाने आए सफीक को मिली मौत
हादसे मृत हुए सफीक (12) पुत्र इदरीश श्रावस्ती जनपद के मल्हीपुर थाना क्षेत्र के चौरीकुटिया गांव का रहने वाला है। कुछ दिन पहले ही वह अपने नाना स्वर्गीय अब्बास अली के घर बारावफात की खुशियां मनाने आया था। लेकिन किसी को नहीं पता था कि वह यहां आखिरी बार आया है। नानी ने सफीक को ढेर सारा प्यार कर जुलूस में भेजा था, लेकिन उसकी मौत की खबर सुनने के बाद से वह बेहाल हैं। जिन हाथों से उन्होंने सफीक को तैयार किया था, रविवार को उन्हीं हाथों से उठा कर वह उसके शव को लेकर श्रावस्ती के चौरीकुटिया पहुंची, जहां उसे कब्र में दफन किया गया।
शिकायत का संज्ञान लेता बिजली विभाग तो नहीं होता हादसा
ग्रामीण नईम अहमद, मुबारक अहमद, शरीफ अहमद आदि ने आरोप लगाया कि विद्युत विभाग की लापरवाही से इतना बड़ा हादसा हुआ है। लोगों ने बताया कि मासूपुर के ग्रामीणों कई बार मार्ग के करीब से गुजर रहे हाईटेंशन लाइन को ऊपर करने की मांग की थी। इस संबंध में विद्युत उपकेंद्र नानपारा व क्षेत्रीय लाइनमैन से बात कर तार सही करने को कहा गया था, लेकिन किसी भी जिम्मेदार ने ग्रामीणों की समस्या का संज्ञान नहीं लिया। इसी लापरवाही के चलते छह लोगों ने अपनी जान गंवा दी।