- कैंसर व मधुमेह का कारण बनने वाली मछली पर वर्ष 2000 से प्रतिबंध
संवाद न्यूज एजेंसी
बहराइच। प्रतिबंध के बावजूद जिले में थाई मांगुर मछली पुलिस के संरक्षण में धड़ल्ले से बेची जा रही है। कैंसर और मधुमेह बीमारी का कारण बनने वाली थाई मांगुर मछली की बिक्री पर वर्ष दो हजार से प्रतिबंध लगा है। थाई मांगुर मछली के सेवन से होने वाले नुकसान के दृष्टिगत ही एनजीटी की ओर से इस मछली के पालन, बिक्री और रखरखाव पर रोक है। इसका उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने के साथ जेल भेजने तक का प्रावधान है।
इसके बावजूद जिम्मेदारों की उदासीनता व लापरवाही के चलते जिले में कई स्थानों पर धड़ल्ले से थाई मांगुर मछली की बिक्री हो रही है। इस कारण इस मछली का सेवन करने वालों की सेहत दांव पर लग रही है। चित्तौरा विकासखंड में लगने वाली मछली मंडी में तो खुलेआम इस प्रतिबंधित मछली की बिक्री देखी जा सकती है। बिक्री करने वालों से जब पूछा गया कि प्रतिबंध के बाद भी इसे क्यों बेचा जा रहा है, तो सभी ने चुप्पी साध ली। कुछ एक ने बताया कि थाई मांगुर मछली सस्ती मिलने के कारण ज्यादा मुनाफा देती है। इसे बेचने पर पुलिस भी नहीं रोकती है।
अफ्रीकन कैट फिश भी कहलाती थाई मांगुर
रतिबंधित थाई मांगुर मछली को अफ्रीकन कैट फिश भी कहा जाता है और ये सबसे गंदी मछलियों में शुमार है। बताया जाता है, कि यह गंदे पानी में छोटी मछलियों व कीड़े मकोड़ों को खाकर जिंदा रहती है। यही नहीं यह तीन से चार महीनों में ही तीन किलो भार की हो जाती है। इस कारण कम लागत में अधिक मुनाफे के कारण मछली कारोबारियों के लिए इसे बेचना फायदे का सौदा बनता है।
थाई मांगुर मछली को पालना व बेचना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसकी बिक्री पर जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान है। ऐसे में यह मछली मंडियों में कैसे बिक रही है, इसकी जांच करवा कर रोकथाम कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।
डॉ. जितेन्द्र शुक्ला, सहायक मत्स्य निदेशक