बहराइच। नगर निकाय चुनाव में पिछले कई दशकों से समाजवादी पार्टी अपनी पैठ जमाने के लिए जूझती नजर आ रही है। निकाय चुनाव में मतदाता लगातार सपा को नजरअंदाज करते आ रहे हैं। मतदाताओं ने सबसे ज्यादा भरोसा निर्दल प्रत्याशियों पर ही जताया है। अब देखना यह है कि इस बार निकाय चुनाव में मतदाताओं का सियासी दलों पर होगा या फिर एक बार निर्दल प्रत्याशी पर भरोसा जताकर शहर की बागडोर निर्दल प्रत्याशी को सौंपेंगे। हालांकि अभी तक आरक्षण की लिस्ट जारी न होने से संभावित प्रत्याशि चुप्पी साधे हुए हैं। सभी निगाहें की आरक्षण पर टिकीं हुई हैं।
जिले की दो नगर पालिका व दो नगर पंचायतों में शहर की सरकार का मुखिया बनने के लिए सपा बीते कई दशकों से हांफती नजर आ रही है। हालात यह है कि निकाय चुनाव में सपा कभी भी मुख्य लड़ाई में नहीं रही। बात करते हैं कि सदर नगर पालिका की सीट की तो यहां वर्ष 2000 में भाजपा से कन्हैला लाल रूपानी ने जीत दर्ज की थी। उसके बाद 2005 में नगर पालिका की कमान प्रशासक के हाथों में चली गई थी।
2006 से अभी तक नगर पालिका की कमान निर्दल प्रत्याशियों के हाथ में रहा। 2006 निर्दल तेजे खां व 2012 में निर्दल हाजी रेहान खां और उसके बाद 2017 में सीट महिला के खाते में चले जाने के बाद रेहान की पत्पी रूबीना रेहान ने जीत हासिल की थी। वर्ष 2017 में महज नानपारा नगर पालिका की सीट पर सपा व कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी की कांटे की टक्कर में कांग्रेस प्रत्याशी ने बहुत ही कम अंतर से जीत हासिल की थी। यहां सपा लड़ाई में जरूर दिखाई दी थी।
बात करते हैं रिसिया नगर पंचायत की तो यहां भाजपा से 1995 में पहली बार मिथलेश साहू काबिज हुए थे। उसके बाद इस सीट पर निर्दल प्रत्याशियों की दबदबा बना रहा। वर्ष 2007 में भाजपा ने दूसरी बार इस सीट पर अपनी प्रत्याशी नीरू श्रीवास्तव के रूप ने जीत दर्ज की थी। जबकि तीसरी बार 2012 में सामान्य सीट होने के बाद भाजपा के राजेश निगम ने जीत हासिल की थी। यहां कहीं भी सपा नजर नही आई।
जरवल में हमेशा निर्दल प्रत्याशियों का ही दबदबा रहा। हालांकि वर्ष 2017 में कांग्रेस से तस्लीमबानों ने जीत हासिल कर थी। यहां भी सपा दूर-दूर तक कहीं नहीं नजर आई। अब इस बार का निकाय चुनाव प्रदेश की मुख्य सियासी दलों ने लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल मानकर तैयारी कर रहें हैं। बसपा ने भी इस बार अपने सिंबल पर प्रत्याशी को उतारने का एलान किया है।
सपा भी चुनाव को गंभीरता से लड़ने के लिए पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश जारी किया है। सत्ताधारी भाजपा भी चुनाव में सपा को ही अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानकर चुनाव की तैयारी करने में जुटी हुई है। कांग्रेस अपनी जमीन को बचाने व आप ने भी चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए मजबूती के साथ जुटी हुई है।